नागा साधुओं ने आराध्य को अर्पित किया त्रिवेणी का पुण्य, दिखाया शास्त्र और शस्त्र का कौशल
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वाराणसी: बाबा विश्वनाथ की नगरी में कण- कण शंकर का भाव साकार हुआ। गंगा घाट, गलियां और सड़कों पर शिव के गणों का जयघोष। महाशिवरात्रि पर नागा साधुओं ने अपने आराध्य को त्रिवेणी का पुण्य अर्पित किया। शस्त्र और शास्त्र से महादेव के चरणों में श्रद्धा का भाव अर्पित किया।
ब्रह्म मुहूर्त में अखाड़ों में पेशवाई की तैयारी शुरू हो गई। हनुमान घाट से गौदौलिया तक सड़क के दोनों तरफ बैरिकेडिंग की गई थी। हर- हर महादेव का जयकारा लगाते हुए नागा साधुओं की टोली निकली तो सड़क किनारे खड़े श्रद्धालुओं के हाथ खुद ब खुद जुड़ने लगे।
नागा साधुओं का आशीष पाने के लिए हर कोई आतुर नजर आ रहा था। करतब और कौशल का प्रदर्शन करते हुए नागाओं की टोली बाबा के धाम की ओर बढ़ रही थी। गौदौलिया से काशी विश्वनाथ धाम के रास्ते पर श्रधालुओं की कतार हर- हर महादेव का जयघोष कर रही थी।
आचार्य महामंडलेश्वर, महामंडलेश्वर रथ पर सवार होकर तो नागा साधु दौड़ते हुए चल रहे थे। गेट नंबर चार के बाहर पहुंचने पर शंख का जयघोष और डमरू निनाद से साधुओं ने प्रवेश किया। धाम में पहुंचने के बाद तो नागा साधुओं का उल्लास देखते ही बन रहा था।
कोई धाम में जमीन पर लोट रहा था, कोई भाव विह्वल होकर नृत्य कर रहा था। दूसरी ओर नागा सन्यासी शस्त्र कौशल का प्रदर्शन कर रहे थे।
शंख, घंटा घड़ियाल से गूंज उठा अस्सी से दशाश्वमेध घाट
महाशिवरात्रि पर अस्सी से दशाश्वमेध घाट तक हर ओर शंख, घंटा घड़ियाल और हर- हर महादेव की गूंज सुनाई देती रही। केदारेश्वर महादेव मंदिर में जाने वाली केदारघाट की सीढियां पूरी तरह से भर गईं।