शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का अधिकार, लेकिन अराजकता फैलाने वालों की पहचान जरूरी: चिराग पासवान

केंद्रीय मंत्री ने कहा, आंदोलनों ने देश को समय-समय पर दिशा दी और युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर भी दिया

पटना। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन की परंपरा रही है। आंदोलनों ने समय-समय पर देश को दिशा देने के साथ नए युवा चेहरों को आगे आने का अवसर भी दिया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रदर्शन की आड़ में अराजकता फैलाने की कोशिश करने वाले असामाजिक तत्वों की पहचान करना जरूरी है।

चिराग पासवान ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और आंदोलन की अपनी अहमियत है, लेकिन इसका इस्तेमाल किसी भी तरह से अशांति पैदा करने के लिए नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, कुछ लोग प्रदर्शन के दौरान असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे तत्वों को चिन्हित करना आवश्यक है, ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि हालिया प्रदर्शन के दौरान देश में अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश की गई, जिसे केंद्र सरकार ने नियंत्रित किया। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर युवाओं के प्रदर्शन पर राजनीतिक बहस जारी है।

चिराग पासवान के बयान में शांतिपूर्ण विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार मानने और प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत—दोनों बातों पर जोर दिया गया।

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