अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस: नोएडा में फिर चला उद्योगों का पहिया, काम पर लौटे मजदूर
हिंसक प्रदर्शन के बाद हालात सामान्य, लेकिन वेतन बढ़ोतरी और श्रमिक हकों की लड़ाई अब भी जारी
अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के मौके पर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में एक बार फिर रौनक लौटती दिखाई दी है। हालिया हिंसक प्रदर्शन और तनाव के बाद अब उद्योगों का पहिया दोबारा घूमने लगा है और बड़ी संख्या में श्रमिक काम पर लौट आए हैं। हालांकि, हालात सामान्य होने के बावजूद मजदूरों के हकों और वेतन वृद्धि का मुद्दा अभी भी अधूरा बना हुआ है।
दरअसल, अप्रैल महीने में वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर नोएडा के फेज-2 औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों ने बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया था। 10 अप्रैल तक हजारों कामगार एकजुट हो गए और काम ठप कर प्रदर्शन करने लगे। 13 अप्रैल को यह आंदोलन अचानक हिंसक हो गया, जिसमें कई कंपनियों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं।
घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए 11 एफआईआर दर्ज कीं और 62 लोगों को गिरफ्तार किया। प्रशासन का दावा है कि इस हिंसा के पीछे बाहरी तत्वों का हाथ था, जिनका उद्देश्य नोएडा की औद्योगिक छवि को नुकसान पहुंचाना था।
अब हालात धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहे हैं। 300 से अधिक कंपनियों में उत्पादन दोबारा शुरू हो चुका है और श्रमिक अपनी ड्यूटी पर वापस आ गए हैं। लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है—क्या श्रमिकों को उनका हक मिलेगा?
जिले के लाखों कामगार आने वाले दिनों में वेतन बढ़ोतरी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। श्रमिक संगठनों का कहना है कि काम पर लौटना उनकी मजबूरी हो सकती है, लेकिन उनकी मांगें अब भी कायम हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि आखिर कब तक श्रमिकों को उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।





