गोरखपुर में बड़ा फर्ज़ीवाड़ा: असली SDM को थप्पड़ मारने वाले कथित नकली IAS ललित किशोर–ललित उर्फ गौरव पर पुलिस की गहन जांच

खुद को IAS अधिकारी बताकर अधिकारियों को धमकाने और सरकारी सिस्टम में हस्तक्षेप करने के आरोप; SDM को थप्पड़ मारने की घटना के बाद पुलिस ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए।

गोरखपुर पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जिसने खुद को IAS अधिकारी बताकर न केवल सरकारी अधिकारियों को भ्रमित किया, बल्कि कथित तौर पर गोरखपुर के SDM को थप्पड़ मारने जैसी गंभीर हरकत भी कर डाली। आरोपी की पहचान ललित किशोर उर्फ गौरव कुमार सिंह के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों ने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है।


IAS बनकर सिस्टम में घुसपैठ करने का आरोप

पुलिस के अनुसार, आरोपी लंबे समय से खुद को IAS अधिकारी बताकर प्रभाव बना रहा था। वह सरकारी दफ्तरों में बिना अनुमति प्रवेश कर बैठकों में हिस्सा लेता था और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश भी देता था।
उसके पास से फर्जी पहचान पत्र, सरकारी लोगो वाले दस्तावेज और मोबाइल में कई संदिग्ध चैट भी बरामद की गई हैं।


SDM को थप्पड़ मारने के बाद खुला मामला

घटना तब सामने आई जब आरोपी ने कथित रूप से असली SDM को थप्पड़ मार दिया। इस हरकत के बाद अधिकारियों ने तुरंत उसकी पहचान की जांच कराई, जिसमें पता चला कि वह IAS अधिकारी नहीं, बल्कि फर्जी पहचान के सहारे सरकारी सिस्टम में हस्तक्षेप कर रहा था।

घटना के बाद प्रशासनिक अमले में भारी नाराज़गी फैल गई और पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में ले लिया।


पुलिस भी हुई चौंक—ऐसे करता था सबको विश्वास में

पुलिस पूछताछ में पता चला कि आरोपी—

  • खुद को IAS 2022 बैच का अधिकारी बताता था

  • सरकारी कार्यक्रमों में बिना अनुमति शामिल होता था

  • अफसरों को ‘निरीक्षण’ के नाम पर बुलाकर सवाल-जवाब करता था

  • नाम और पद बदलकर लोगों पर धौंस जमाता था

पुलिस के अनुसार उसके पास से नकली लेटरहेड, फर्जी ऑर्डर कॉपी और प्रशासनिक दस्तावेज भी मिले हैं।


साइकोलॉजिकल प्रोफाइलिंग भी होगी

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी को इस तरह का फर्जी प्रशासनिक किरदार निभाने की प्रेरणा कैसे मिली।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि वह सोशल मीडिया और वास्तविक प्रशासनिक अधिकारियों की नकल कर काफी समय से यह खेल खेल रहा था।


IPC की कई धाराओं में केस दर्ज

आरोपी पर फिलहाल IPC की धारा 420, 468, 471 और सरकारी कार्य में बाधा डालने सहित गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
पुलिस उसके पिछले रिकॉर्ड, नेटवर्क और इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है।


अधिकारियों में सतर्कता बढ़ाई गई

घटना के बाद जिला प्रशासन ने निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की पहचान जांचे बिना उन्हें संवेदनशील बैठकों या सरकारी दफ्तरों में प्रवेश न दिया जाए।

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