अयोध्या में SIR फॉर्म को मिला धार्मिक रंग: साधु-संत मां वाले कॉलम में दर्ज कर रहे सीता, कौशल्या और सुमित्रा के नाम

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में सनातन आस्था की झलक, धार्मिक नेताओं की अपील पर साधु-संत कर रहे नामों की एंट्री

अयोध्या में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के गणना प्रपत्र ने इस बार एक अनोखा धार्मिक रूप ले लिया है। साधु-संतों ने फॉर्म के “मां” वाले कॉलम में माता सीता, जानकी, कौशल्या और सुमित्रा के नाम दर्ज करना शुरू कर दिया है। यह प्रवृत्ति स्थानीय धार्मिक समुदाय और प्रशासनिक अधिकारियों दोनों के लिए नया और चौंकाने वाला अनुभव बनी हुई है।


डॉ. राम विलास दास वेदांती की पहल

इस प्रकरण की शुरुआत हिंदू धाम पीठाधीश्वर और भाजपा के पूर्व सांसद डॉ. राम विलास दास वेदांती ने की। उन्होंने साधु-संतों से अपील की कि SIR फॉर्म में मां वाले कॉलम में माता सीता, जानकी, कौशल्या और सुमित्रा के नाम दर्ज किए जाएं।

इस अपील के बाद संत-महंतों और धार्मिक पंडितों में इस पहल को लेकर उत्साह पैदा हो गया। बड़ी संख्या में साधु-संत अब यही नाम दर्ज कर रहे हैं और इस प्रक्रिया में स्थानीय मंदिरों और आश्रमों का भी योगदान देखा जा रहा है।


स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया

निर्वाचन कार्य से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि “मां वाले कॉलम में दर्ज नाम से जुड़े साक्ष्य प्रस्तुत करने की बाध्यता नहीं है। जरूरत पड़ने पर मतदाताओं को बाद में नोटिस जारी की जा सकती है।”

आधिकारिक सूत्रों का यह भी कहना है कि SIR फॉर्म में धार्मिक आस्था के रंग भरने से मतदान प्रक्रिया या कानूनी प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसे स्थानीय संस्कृति और आस्था की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है।


सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक प्रतीकात्मक पहल है। साधु-संतों की इस प्रवृत्ति से यह संदेश भी जाता है कि वे सामाजिक और प्रशासनिक मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

स्थानीय लोग और पर्यटक इस अनोखे दृश्य को देख कर प्रभावित हैं। कई लोग इसे सनातन धर्म और लोक परंपराओं का प्रतीक मान रहे हैं।


संपर्क और जागरूकता

स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे SIR फॉर्म भरते समय ध्यानपूर्वक जानकारी दर्ज करें। यदि किसी को किसी प्रकार की असमंजस या समस्या हो तो वे सीधे निर्वाचन अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।

निर्वाचन अधिकारियों ने कहा कि यह प्रक्रिया केवल मतदाता सूची को अद्यतन करने और विशेष गहन पुनरीक्षण को पूरा करने के लिए है।


निष्कर्ष

अयोध्या में SIR फॉर्म पर धार्मिक रंग भरना न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, बल्कि स्थानीय आस्था और संस्कृति की अभिव्यक्ति भी बन गया है। साधु-संतों और धार्मिक नेताओं की इस पहल ने चुनाव प्रक्रिया में सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टिकोण को भी जोड़ दिया है।

अगले कुछ सप्ताह में यह देखने लायक होगा कि इस पहल का मतदाता सूची और स्थानीय प्रशासन पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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