‘भारत-अमेरिका रिश्तों में अड़ंगा डाल रहा चीन’ — अमेरिकी रक्षा रिपोर्ट में बड़ा दावा
US डिफेंस डिपार्टमेंट की रिपोर्ट में कहा गया: LAC पर तनाव और इंडो-पैसिफिक रणनीति के जरिए चीन भारत-अमेरिका साझेदारी को कमजोर करने की कोशिश में

भारत और अमेरिका के बीच लगातार मजबूत होते रणनीतिक रिश्तों के बीच चीन एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है। अमेरिकी रक्षा विभाग (US Department of Defense) की ताज़ा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन जानबूझकर भारत-अमेरिका संबंधों में बाधा डालने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव बनाए रखना और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी आक्रामक नीति को आगे बढ़ाना चीन की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
LAC पर तनाव बना रणनीतिक हथियार
अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन भारत के साथ सीमा विवाद को पूरी तरह सुलझाने के बजाय इसे एक रणनीतिक दबाव के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। LAC पर समय-समय पर तनाव बढ़ाकर बीजिंग नई दिल्ली को सैन्य और कूटनीतिक रूप से उलझाए रखना चाहता है, ताकि भारत अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ गहरे रणनीतिक गठबंधन की दिशा में तेजी से आगे न बढ़ सके।
इंडो-पैसिफिक में भारत-अमेरिका साझेदारी से चीन को चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन को भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी, सैन्य अभ्यासों और तकनीकी सहयोग से गहरी चिंता है। क्वाड (QUAD) जैसे मंचों पर भारत की सक्रिय भूमिका को चीन अपने क्षेत्रीय प्रभाव के लिए खतरे के रूप में देखता है। इसी वजह से वह क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा कर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
मोदी-बाइडन समीकरण पर नजर
US रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी नेतृत्व के बीच मजबूत होते संबंध चीन के लिए रणनीतिक चुनौती बन चुके हैं। चीन नहीं चाहता कि भारत, अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति का एक केंद्रीय स्तंभ बने। इसी कारण बीजिंग कूटनीतिक, सैन्य और मनोवैज्ञानिक दबाव की नीति अपना रहा है।
चीन की दीर्घकालिक रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की यह नीति केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि वह उन सभी देशों को निशाना बना रहा है जो अमेरिका के साथ मिलकर उसके प्रभाव को संतुलित करना चाहते हैं। भारत के मामले में सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे चीन के लिए प्रभावी साधन बन गए हैं।
भारत-अमेरिका रिश्तों पर असर?
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन की कोशिशों के बावजूद भारत-अमेरिका संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। रक्षा, तकनीक, व्यापार और वैश्विक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी अब रणनीतिक स्तर पर पहुंच चुकी है।
कुल मिलाकर, अमेरिकी रिपोर्ट यह स्पष्ट संकेत देती है कि चीन भारत-अमेरिका संबंधों को अपने भू-राजनीतिक हितों के लिए खतरा मानता है और उन्हें कमजोर करने की हरसंभव कोशिश कर रहा है। आने वाले समय में यह टकराव केवल सीमा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कूटनीतिक और वैश्विक मंचों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।




