आठ घंटे की नवजात बेटी, स्ट्रेचर पर पत्नी और तिरंगे में लिपटा ताबूत— नम आंखों से हुआ शहीद जवान का अंतिम संस्कार

महाराष्ट्र के सातारा में देश ने देखा बलिदान का सबसे भावुक दृश्य, हर आंख हुई नम

देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले भारतीय सेना के जवान को महाराष्ट्र के सातारा में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। यह विदाई सिर्फ एक सैनिक को नहीं, बल्कि एक पिता, एक पति और एक बेटे को थी—जिसकी शहादत ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया।

सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया, जब शहीद जवान की पत्नी को स्ट्रेचर पर अंतिम दर्शन के लिए लाया गया। कुछ ही घंटे पहले उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया था, जिसे अभी दुनिया को ठीक से देखने का मौका भी नहीं मिला था। महज आठ घंटे की नवजात बच्ची अपने पिता की गोद में आने से पहले ही उनके बलिदान की कहानी का हिस्सा बन गई।

तिरंगे में लिपटे शहीद के पार्थिव शरीर को जब अंतिम यात्रा के लिए निकाला गया, तो पूरे गांव की आंखें भर आईं। “भारत माता की जय” और “शहीद अमर रहें” के नारों के बीच लोग अपने आंसू नहीं रोक पाए। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, हर किसी के चेहरे पर गर्व और गम एक साथ साफ झलक रहा था।

सेना के अधिकारियों ने शहीद को सलामी दी और उनके सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए कहा कि देश उनकी कुर्बानी को कभी नहीं भूलेगा। स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि भी अंतिम संस्कार में मौजूद रहे और शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया।

यह दृश्य सिर्फ सातारा का नहीं था, बल्कि पूरे देश की भावना को दर्शाता था—जहां एक ओर शोक है, तो दूसरी ओर उस जवान पर गर्व भी, जिसने देश की रक्षा के लिए अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया। नवजात बेटी के लिए उसके पिता भले ही आज इस दुनिया में न हों, लेकिन उनकी शहादत हमेशा उसके लिए सम्मान और प्रेरणा का प्रतीक बनी रहेगी।

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