‘बहुत दुख हुआ था’; शक्ति सामंत की 100वीं जयंती पर बेटे ने छलका दर्द, कहा – वे पद्मश्री के हकदार थे
‘आराधना’, ‘अमर प्रेम’ और ‘कश्मीर की कली’ जैसी फिल्मों के निर्माता-निर्देशक शक्ति सामंत की 100वीं जयंती पर बेटे आशिम सामंत ने पिता को याद किया और राष्ट्रीय सम्मान न मिलने का दुख जताया

मुंबई | 13 जनवरी 2026 — हिंदी सिनेमा के मशहूर निर्माता-निर्देशक शक्ति सामंत की आज 100वीं जयंती है। इस अवसर पर उनके बेटे आशिम सामंत ने अपने दिवंगत पिता को याद करते हुए कई बातें साझा कीं।
शक्ति सामंत ने अपने करियर में ‘आराधना’, ‘अमर प्रेम’ और ‘कश्मीर की कली’ जैसी हिट फिल्में बनाई। वे बहुमुखी प्रतिभा के कहानीकार थे और अलग-अलग जॉनर में आसानी से काम करते थे। उनकी पहली हिंदी फिल्म ‘बहू’ हो, क्राइम थ्रिलर ‘हावड़ा ब्रिज’, रोमांटिक थ्रिलर ‘चाइना टाउन’ और ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ हों, या रोमांटिक ब्लॉकबस्टर ‘आराधना’, ‘अमर प्रेम’ और ‘कश्मीर की कली’ — हर फिल्म दर्शकों के दिल में जगह बनाने में सफल रही।
बेटे का दर्द: राष्ट्रीय सम्मान नहीं मिला
आशिम सामंत ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा,
“मेरे पापा पद्म श्री या पद्म विभूषण जैसे नेशनल सम्मान के हकदार थे। मुझे बताया गया है कि ऐसी चीजों के लिए पॉलिटिकली दबाव डालना पड़ता है। वह ऐसे इंसान नहीं थे, जो इसके लिए पूछते।”
उन्होंने आगे कहा,
“सोचिए, ‘अमर प्रेम’ को म्यूजिक अवॉर्ड नहीं मिला और उसकी जगह किसी दूसरी फिल्म को अवॉर्ड मिला। यह ही बहुत कुछ कहता है। उन्होंने एक बार कहा था कि उन्हें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड मिलना चाहिए था।”
शक्ति सामंत का जन्म 13 जनवरी 1926 को हुआ और उन्होंने 9 अप्रैल 2009 को 83 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कहा। वे अपने जमाने के टॉप डायरेक्टर्स में शामिल थे और अपनी कमर्शियल फिल्मों में सामाजिक मुद्दों जैसे महिलाओं की हालत, लालच और भ्रष्टाचार पर फोकस किया करते थे।
