तमिलनाडु चुनाव 2026: ‘थलापति’ विजय का ऐतिहासिक उदय; नतीजों के बाद पिता का आशीर्वाद लेने पहुंचे टीवीके प्रमुख

तमिलनाडु की सत्ता के गलियारों में दशकों से कायम द्रविड़ दलों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए सुपरस्टार विजय ने एक नई इबारत लिख दी है। उनकी पार्टी टीवीके ने युवाओं और बदलाव की उम्मीद रखने वाले मतदाताओं को एकजुट कर राज्य की राजनीति में एक शक्तिशाली विकल्प पेश किया है।

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में आज एक नए युग का सूत्रपात हुआ है। 4 मई 2026 को आए विधानसभा चुनाव के नतीजों ने पांच दशकों से चले आ रहे द्रविड़ राजनीति के द्विध्रुवीय (DMK-AIADMK) वर्चस्व को हिलाकर रख दिया है। सुपरस्टार विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्टी कझगम (TVK) ने अपने पहले ही चुनावी मुकाबले में ‘ब्लॉकबस्टर’ प्रदर्शन करते हुए 100 से अधिक सीटों पर बढ़त और जीत हासिल कर सबको चौंका दिया है। इस ऐतिहासिक सफलता के बीच एक भावुक क्षण तब देखने को मिला, जब विजय अपने चेन्नई स्थित आवास से सीधे अपने पिता और दिग्गज फिल्म निर्देशक एस.ए. चंद्रशेखर से मिलने पहुंचे।

पिता-पुत्र के बीच सुलह और राजनीति का संगम

विजय और उनके पिता के बीच पिछले कुछ वर्षों में वैचारिक मतभेदों की खबरें अक्सर सुर्खियों में रही थीं। हालांकि, राजनीति के मैदान में उतरने के बाद विजय ने न केवल अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई, बल्कि आज के नतीजों ने उनके निर्णय पर मुहर लगा दी। जब विजय अपने पिता के घर पहुंचे, तो वहां का माहौल काफी भावुक था। एस.ए. चंद्रशेखर ने मीडिया से बात करते हुए गर्व के साथ कहा, “यह तमिलनाडु के लिए एक बड़े बदलाव की शुरुआत है। विजय हमेशा से लोगों के लिए कुछ करना चाहता था और आज जनता ने उसे वह मौका दे दिया है।” पिता ने विजय को गले लगाकर जीत का आशीर्वाद दिया, जिसे समर्थकों ने ‘विजय के नए सफर की सबसे शुभ शुरुआत’ बताया।

टीवीके का प्रदर्शन: द्रविड़ किलों में बड़ी सेंध

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, टीवीके 110 से अधिक सीटों पर निर्णायक बढ़त बनाए हुए है।

  • युवा और पहली बार के वोटर: विजय की पार्टी को सबसे ज्यादा समर्थन 18-35 आयु वर्ग के मतदाताओं से मिला है, जो परंपरागत राजनीति से हटकर कुछ नया चाहते थे।

  • स्वतंत्र चुनाव का दांव: विजय ने किसी भी बड़े गठबंधन (DMK या AIADMK) का हिस्सा बनने के बजाय अकेले चुनाव लड़ने का साहसिक निर्णय लिया, जो उनके लिए ‘मास्टरस्ट्रोक’ साबित हुआ।

  • भ्रष्टाचार विरोधी लहर: ‘व्हिसल पोडू’ (सीटी बजाओ) के नारे के साथ विजय ने भ्रष्टाचार और परिवारवाद को अपना मुख्य निशाना बनाया, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जनता का जुड़ाव बढ़ा।


चेन्नई की सड़कों पर जश्न का सैलाब

विजय के आवास ‘पनीर’ और पार्टी मुख्यालय के बाहर समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा है। सड़कों पर ‘थलापति’ के पोस्टर लगे हैं और प्रशंसक ढोल-नगाड़ों के साथ नाच रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि विजय ने एमजीआर (MGR) की विरासत को एक आधुनिक और नई सोच के साथ जीवित कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीवीके अब तमिलनाडु की राजनीति में केवल एक ‘किंगमेकर’ नहीं, बल्कि सत्ता की मुख्य दावेदार बन गई है।

तमिलनाडु ने यह साफ कर दिया है कि वह अब केवल दो दलों के बीच नहीं फंसा रहना चाहता। विजय की यह जीत न केवल उनके सिनेमाई करिश्मे की जीत है, बल्कि उनके जमीनी स्तर पर किए गए कल्याणकारी कार्यों (Welfare works) का परिणाम भी है। पिता से आशीर्वाद लेकर निकले विजय अब पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों के साथ बैठक करेंगे ताकि भविष्य की रणनीति और सरकार गठन की संभावनाओं पर चर्चा की जा सके। बंगाल के बाद अब तमिलनाडु के ये नतीजे देश की क्षेत्रीय राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं।

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