मिडिल ओवर्स का खतरनाक बल्लेबाज: क्या टीम इंडिया ने रजत पाटीदार को हल्के में लिया?

गुजरात टाइटन्स के खिलाफ क्वालिफायर-1 में नाबाद पारी के बाद फिर चर्चा में पाटीदार, आईपीएल फॉर्म ने उठाए चयन पर सवाल

रजत पाटीदार एक बार फिर अपनी बल्लेबाज़ी से सुर्खियों में हैं। गुजरात टाइटन्स के खिलाफ क्वालिफायर-1 में उन्होंने जिस तरह नाबाद पारी खेली, उसने यह सवाल और तेज कर दिया है कि क्या टीम इंडिया ने इस खिलाड़ी की क्षमता का सही आकलन किया है।

पाटीदार को लंबे समय से एक ऐसे बल्लेबाज के रूप में देखा जाता है जो मिडिल ओवर्स में मैच की दिशा बदल सकता है। स्पिन के खिलाफ उनकी टाइमिंग, स्ट्राइक रोटेट करने की क्षमता और जरूरत पड़ने पर आक्रामक हो जाने का अंदाज उन्हें अलग बनाता है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उन्हें वह लगातार मौका नहीं मिला, जिसकी कई क्रिकेट जानकारों ने उम्मीद की थी।

आईपीएल में पाटीदार की बल्लेबाज़ी बार-बार यह साबित करती रही है कि वह सिर्फ एक घरेलू या लीग खिलाड़ी नहीं, बल्कि बड़े मंच पर दबाव संभालने वाला बल्लेबाज है। क्वालिफायर-1 जैसी बड़ी मैच में नाबाद पारी खेलना उनकी मानसिक मजबूती और मैच अवेयरनेस दोनों को दिखाता है।

चयन को लेकर बहस इसलिए भी उठ रही है क्योंकि भारतीय टीम में मिडिल ऑर्डर लंबे समय से स्थायी विकल्पों की तलाश में है। ऐसे में रजत पाटीदार जैसा बल्लेबाज, जो अलग-अलग परिस्थितियों में रन बना सकता है, टीम संयोजन में और पहले शामिल किया जा सकता था, ऐसा कई पूर्व खिलाड़ी मानते हैं।

अब जब आईपीएल में उनका प्रदर्शन फिर से चमका है, तो टीम इंडिया के चयन पर सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या रजत पाटीदार को देर से पहचाना गया, या फिर भारतीय क्रिकेट में ऐसे खिलाड़ियों को अक्सर उस वक्त याद किया जाता है जब वे पहले ही अपनी उपयोगिता साबित कर चुके होते हैं?

एक बात साफ है—रजत पाटीदार अब नजरअंदाज करने वाले खिलाड़ी नहीं रह गए हैं। उनकी बल्लेबाज़ी ने एक बार फिर दिखा दिया है कि मिडिल ओवर्स में वह किसी भी गेंदबाज़ी आक्रमण के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।

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