CJP का जंतर-मंतर प्रदर्शन: युवाओं की आवाज़ या सिस्टम पर बड़ा सवाल?
कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में उठी 5 प्रमुख मांगें, शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर केंद्र सरकार को घेरा
दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले हुए बड़े प्रदर्शन ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी। इस आंदोलन का नेतृत्व संस्थापक अभिजीत दीपके ने किया, जो हाल ही में विदेश से लौटकर सीधे इस विरोध में शामिल हुए। प्रदर्शन में देशभर से आए छात्र, प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थी, युवा और अभिभावक बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
प्रदर्शनकारियों का मुख्य फोकस देश की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग पर रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सिस्टम में पारदर्शिता की कमी है और छात्रों पर मानसिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
आंदोलन के दौरान पांच प्रमुख मांगें सामने रखी गईं। इनमें सबसे पहली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की रही, जिसे प्रदर्शनकारियों ने “जिम्मेदारी से बचाव” बताया। दूसरी मांग निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने की थी, ताकि पेपर लीक और अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।
तीसरी मांग डिजिटल शिक्षा सुधार को लेकर थी, जिसमें ग्रामीण और शहरी शिक्षा के बीच बढ़ती खाई को कम करने की बात कही गई। चौथी मांग मणिपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सामान्य और सुरक्षित शिक्षा वातावरण सुनिश्चित करने की रही। वहीं पांचवीं मांग छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर थी, जिसमें काउंसलिंग और सपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने नारेबाजी करते हुए सरकार से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की। पुलिस सुरक्षा के बीच प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, हालांकि कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण जरूर दिखाई दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन सिर्फ एक संगठन का विरोध नहीं बल्कि देश के युवा वर्ग में बढ़ते असंतोष का संकेत भी है। शिक्षा व्यवस्था पर लगातार उठ रहे सवाल सरकार के लिए चेतावनी के रूप में देखे जा रहे हैं।
अब देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर कितना गंभीरता से ध्यान देती है और क्या वास्तव में शिक्षा प्रणाली में कोई बड़ा सुधार संभव हो पाता है या नहीं।




