लोंगोवाल बरसी पर सियासी दूरी

संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की पुण्यतिथि पर अकाली दल के कार्यक्रम से हरियाणा सीएम नायब सिंह सैनी की दूरी ने पंजाब की सियासत में चर्चाओं को हवा दे दी।

संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की 41वीं पुण्यतिथि पर पंजाब के लोंगोवाल में पंथक राजनीति का शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आयोजित बरसी समारोह को अकाली दल के दोनों धड़ों ने अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के मंच के रूप में इस्तेमाल किया। इसी बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का कार्यक्रम में शामिल नहीं होना चर्चा का विषय बन गया।

संत लोंगोवाल ने पंजाब में शांति और विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ पंजाब समझौता किया था। 20 अगस्त 1985 को संगरूर के शेरपुर में उनकी हत्या कर दी गई थी। इसके बाद उनकी पुण्यतिथि पर हर साल विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठन उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं।

इस बार शिरोमणि अकाली दल और अकाली दल पुनर-सुरजीत दोनों ही धड़े संत लोंगोवाल की विरासत पर अपना दावा मजबूत करने की कोशिश में दिखाई दिए। कार्यक्रम को पंजाब की पंथक राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसी बीच भाजपा-अकाली गठबंधन की संभावित चर्चाओं के बीच नायब सिंह सैनी का कार्यक्रम से दूरी बनाना राजनीतिक हलकों में सवाल खड़े कर रहा है। बताया गया कि उनका लोंगोवाल पहुंचने का कार्यक्रम अंतिम समय में रद्द हो गया। इसके पीछे कारण को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर है कि पंजाब चुनाव से पहले भाजपा और अकाली दल के रिश्ते किस दिशा में जाते हैं। वहीं अकाली राजनीति के दोनों धड़ों के बीच संत लोंगोवाल की विरासत को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।

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