यूपी पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट में आज फिर सुनवाई, 11 याचिकाओं पर टिकी नजरें
ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले को चुनौती, पिछड़ा वर्ग आयोग का हलफनामा अदालत ने रिकॉर्ड पर लिया
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय से कराने और ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में शुक्रवार को फिर सुनवाई होगी। दोपहर 12 बजे से प्रस्तावित सुनवाई में चुनाव कराने की समयसीमा और सरकार के 25 मई के शासनादेश को चुनौती देने वाले मुद्दों पर बहस जारी रहेगी।
इस मामले में हाईकोर्ट में कुल 11 याचिकाओं को एक साथ संबद्ध कर सुनवाई की जा रही है। इनमें छह जनहित याचिकाएं भी शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव निर्धारित समय पर कराए जाएं और मौजूदा ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के फैसले पर विचार किया जाए।
सुनवाई के दौरान पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया, जिसे अदालत ने रिकॉर्ड पर ले लिया। पंचायत चुनाव में पिछड़े वर्गों के आरक्षण से संबंधित प्रक्रिया और आयोग की रिपोर्ट इस मामले के महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल हैं।
याचिकाओं में 25 मई को जारी शासनादेश को चुनौती देते हुए कहा गया है कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक बनाए रखना कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के लिए समयबद्ध कार्यक्रम तय करने की मांग भी की है।
अब अदालत में होने वाली सुनवाई से पंचायत चुनाव की समयसीमा और प्रशासकों की नियुक्ति को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। हालांकि, अंतिम निर्णय हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा। ग्राम पंचायतों के कार्यकाल और प्रशासक नियुक्ति का मुद्दा इससे पहले भी हाईकोर्ट में उठ चुका है।





