RSS-BJP पर दिग्विजय सिंह के बयान से कांग्रेस में मतभेद, विरोध और समर्थन में बंटी पार्टी
संघ की संगठनात्मक शक्ति की सराहना पर दिग्विजय सिंह के बयान ने कांग्रेस के भीतर नई बहस छेड़ दी, कई नेताओं ने जताई आपत्ति

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की संगठनात्मक क्षमता की सराहना किए जाने के बाद पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। उनके बयान ने कांग्रेस को दो खेमों में बांट दिया है—जहां कुछ नेता इसे एक यथार्थवादी राजनीतिक टिप्पणी मान रहे हैं, वहीं कई नेताओं ने इस पर कड़ा विरोध जताया है।
दिग्विजय सिंह ने हाल ही में RSS की मजबूत संगठनात्मक संरचना और उसकी जमीनी पकड़ का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष को भी इस पहलू को समझने की जरूरत है। उनके इस बयान को राजनीतिक गलियारों में BJP और RSS के प्रति नरम रुख के रूप में देखा जा रहा है, जिससे कांग्रेस के भीतर असहजता बढ़ गई।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पवन खेड़ा और सुप्रिया श्रीनेत ने इस बयान से असहमति जताते हुए कहा कि RSS की विचारधारा कांग्रेस के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन की मजबूती की सराहना करना और उसकी विचारधारा को स्वीकार करना दो अलग बातें हैं, लेकिन ऐसे बयानों से गलत राजनीतिक संदेश जाता है।
दूसरी ओर, पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि दिग्विजय सिंह का बयान रणनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि किसी विरोधी संगठन की ताकत को समझना राजनीतिक विश्लेषण का हिस्सा होता है और इसका मतलब समर्थन नहीं होता।
इस विवाद ने कांग्रेस के भीतर वैचारिक स्पष्टता और राजनीतिक रणनीति को लेकर चल रही बहस को फिर से तेज कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि 2025 के राजनीतिक माहौल में ऐसे बयान विपक्षी दलों को नया मुद्दा दे सकते हैं और पार्टी की एकजुटता पर भी असर डाल सकते हैं।
फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन यह साफ है कि दिग्विजय सिंह की टिप्पणी ने पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी इस विवाद को किस तरह संभालती है और क्या इससे उसकी राजनीतिक दिशा पर कोई असर पड़ता है।



