पश्चिम एशिया तनाव से कच्चे तेल में भारी उछाल, ब्रेंट क्रूड 8% बढ़कर कई साल के उच्च स्तर पर

सप्लाई संकट की आशंका से वैश्विक बाजारों में हलचल, निवेशकों में बढ़ी चिंता

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर देखने को मिल रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में करीब 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 109.24 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। वहीं यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 111.54 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा।

यह तेजी मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और आपूर्ति बाधाओं की आशंका के कारण देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तनाव ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, जिससे बाजार में घबराहट का माहौल बन गया है।

अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को लेकर दिए गए सख्त बयान के बाद स्थिति और भी संवेदनशील हो गई है। उनके बयान में संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के बाद निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ गई है।

विश्लेषकों के अनुसार, इस संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री मार्ग से तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे वैश्विक बाजारों पर दबाव बढ़ा है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है।

पिछले एक सप्ताह में WTI क्रूड में लगभग 11.94 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि ब्रेंट क्रूड में भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो इसका असर न सिर्फ तेल कीमतों पर बल्कि भारतीय रुपये और उभरते बाजारों के निवेश प्रवाह पर भी पड़ सकता है।

वहीं दूसरी ओर, सुरक्षित निवेश की तलाश में सोने जैसी कीमती धातुओं में हल्की गिरावट देखने को मिली है। कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स 0.48 प्रतिशत गिरकर 4,679.70 डॉलर के स्तर पर आ गया।

घरेलू स्तर पर भी इस वैश्विक उथल-पुथल का असर दिखाई दे रहा है, जहां भारतीय शेयर बाजार लगातार दबाव में है और प्रमुख सूचकांक कमजोरी के साथ कारोबार कर रहे हैं।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों को अस्थिर कर रहा है। आने वाले दिनों में यदि हालात नहीं सुधरते, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।

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