भारत-अमेरिका व्यापार में बढ़ा असंतुलन, 54.91 अरब डॉलर का घाटा

बढ़ते इंपोर्ट और वैश्विक मांग के चलते अमेरिका पर बढ़ा दबाव, भारत बना प्रमुख ट्रेड पार्टनर

अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर सामने आए ताजा आंकड़ों ने वैश्विक आर्थिक जगत का ध्यान खींचा है। हालिया सरकारी डेटा के अनुसार, पिछले 12 महीनों में अमेरिका को भारत के साथ व्यापार में 54.91 अरब डॉलर का बड़ा घाटा हुआ है। इस आंकड़े के साथ भारत अब उन प्रमुख देशों में शामिल हो गया है, जिनसे अमेरिका को सबसे ज्यादा व्यापारिक नुकसान होता है।

फरवरी 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका का कुल व्यापार घाटा बढ़कर 57.35 अरब डॉलर पहुंच गया, जो जनवरी की तुलना में 2.67 अरब डॉलर अधिक है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से इंपोर्ट में तेज वृद्धि के कारण हुई, जो एक्सपोर्ट से कहीं ज्यादा रही। फरवरी में अमेरिका का कुल निर्यात 314.8 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 372.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

वस्तु व्यापार के क्षेत्र में अमेरिका को 84.60 अरब डॉलर का घाटा हुआ, जबकि सेवाओं के क्षेत्र में 27.26 अरब डॉलर का अधिशेष दर्ज किया गया। हालांकि, सेवाओं से मिलने वाला फायदा वस्तु व्यापार के नुकसान की भरपाई नहीं कर सका।

भारत अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल रहा। केवल फरवरी महीने में ही अमेरिका ने भारत के साथ करीब 3.5 अरब डॉलर का वस्तु व्यापार घाटा दर्ज किया। 12 महीने के आंकड़ों में यह हिस्सा करीब 5.01 फीसदी रहा, जो दोनों देशों के बीच मजबूत व्यापारिक प्रवाह को दर्शाता है।

इस दौरान अमेरिका ने भारत से 101.97 अरब डॉलर के सामान का आयात किया, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग उत्पाद और अन्य औद्योगिक वस्तुएं प्रमुख रहीं। वहीं, इन आयातों से अमेरिका को 12.34 अरब डॉलर की कस्टम ड्यूटी भी प्राप्त हुई।

वैश्विक स्तर पर मेक्सिको, वियतनाम और चीन के साथ भी अमेरिका का व्यापार घाटा ऊंचा बना हुआ है। वहीं, कैपिटल गुड्स, कंप्यूटर, सेमीकंडक्टर और कच्चे तेल की बढ़ती मांग ने आयात को और बढ़ाया है।

हालांकि, साल-दर-साल के आंकड़ों में कुछ राहत भी दिखी है। पिछले वर्ष की तुलना में कुल व्यापार घाटा कुछ कम हुआ है, जिससे संकेत मिलता है कि लंबे समय में संतुलन की दिशा में सुधार हो सकता है।

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