नीतीश कुमार ने विधान परिषद से दिया इस्तीफा, राज्यसभा सदस्य बनने के बाद बड़ा राजनीतिक कदम
लंबे राजनीतिक सफर में नया मोड़, 2006 से एमएलसी रहे नीतीश अब राज्यसभा में करेंगे प्रवेश

पटना में बिहार की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। यह कदम उनके हाल ही में राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के बाद उठाया गया है। उनके इस्तीफे के साथ ही राज्य की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
जदयू नेता और बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित हो चुके हैं, जिसके चलते संवैधानिक प्रक्रिया के तहत विधान परिषद की सदस्यता छोड़ना आवश्यक हो गया था। उनके इस्तीफे का पत्र लेकर पार्टी के नेताओं ने विधान परिषद में औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।
नीतीश कुमार वर्ष 2006 से लगातार बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। इससे पहले वे 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित किए गए थे। उनके इस कदम के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि बिहार की राजनीति में नेतृत्व स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, हालांकि मुख्यमंत्री पद को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टता नहीं आई है।
नीतीश कुमार का राजनीतिक करियर चार दशकों से अधिक लंबा रहा है। उन्होंने 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से अपना पहला चुनाव जीता था। इसके बाद 1989 में वे लोकसभा सांसद बने और केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।
केंद्र सरकार में उन्होंने रेल मंत्री और कृषि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और रेलवे सुधारों के लिए उन्हें व्यापक पहचान मिली। वर्ष 2005 से वे लगातार बिहार के मुख्यमंत्री पद पर बने हुए हैं और “सुशासन बाबू” के नाम से लोकप्रिय हुए।
उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गईं, जिनमें शराबबंदी, साइकिल योजना और पंचायत स्तर पर महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण जैसे ऐतिहासिक फैसले शामिल हैं।
नीतीश कुमार का यह नया राजनीतिक कदम उनके लंबे और प्रभावशाली सफर में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है। माना जा रहा है कि वे जल्द ही राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं।




