शरद पवार की पार्टी में सियासी उलझन: सुप्रिया सुले ने शाह से की मुलाकात, कांग्रेस से दूरी
बीएमसी चुनाव से पहले एनसीपी में उठे सवाल – शरद पवार की मुंबई से दूरी और सुप्रिया सुले की सियासी चाल

महाराष्ट्र में बीएमसी सहित 29 नगर निगमों के चुनाव के ऐलान के साथ ही सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार मुंबई से दूरी बनाए हुए हैं, वहीं उनकी राजनीतिक वारिस मानी जाने वाली सुप्रिया सुले ने अपने सांसदों के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की, जिससे राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं।
कांग्रेस के एजेंडों से दूरी
सुप्रिया सुले ने हाल ही में लोकसभा में ईवीएम और वोटिंग प्रक्रिया पर कांग्रेस के आरोपों से अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “मैं इसी मशीन से चार बार चुनकर आई हूं, इसलिए मैं ईवीएम या VVPAT पर सवाल नहीं उठाऊंगी।” इस स्टैंड ने कांग्रेस को झटका दिया और विपक्ष में अलग राय की चर्चा को बढ़ावा दिया।
अमित शाह से मुलाकात के मायने
ईवीएम विवाद के बाद सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र के स्थानीय मुद्दों पर अमित शाह से मुलाकात की। उन्होंने बीड के सरपंच संतोष देशमुख की हत्या का मामला उठाया और उनके परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। हालांकि, इस मुलाकात ने राजनीतिक विश्लेषकों के बीच सवाल खड़ा कर दिया कि क्या सुप्रिया सुले का रुख एनसीपी के पारंपरिक एजेंडों से अलग हो रहा है।
शरद पवार और मुंबई से दूरी
बीएमसी चुनावों के महत्व को देखते हुए शरद पवार की मुंबई से गैर-मौजूदगी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। एनसीपी का महाविकास अघाड़ी के साथ गठबंधन होगा या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने भी शरद पवार की गैर-मौजूदगी पर सवाल उठाए और कहा कि जब वे मुंबई आएंगे, तभी सीट शेयरिंग और गठबंधन की स्थिति स्पष्ट होगी।
पवार परिवार में सियासी समीकरण
एनसीपी के दोनों प्रमुख खेमों – शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार – के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। हाल ही में उनके बीच संबंधों में निकटता आई है। सुप्रिया सुले भी कई मुद्दों पर अजित पवार का समर्थन करती दिख रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पवार परिवार की इस सामूहिक रणनीति का असर आगामी बीएमसी चुनाव और महाराष्ट्र की राजनीति पर महत्वपूर्ण होगा।
सुप्रिया सुले का कांग्रेस से अलग रुख और अमित शाह से मुलाकात, combined with शरद पवार की मुंबई से दूरी, महाराष्ट्र की सियासी तस्वीर को और पेचीदा बनाती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी चुनाव में एनसीपी किस दिशा में सियासी रणनीति अपनाती है।



