धर्म सम्मेलनों से बढ़ेगी समाज में एकता और राष्ट्र सेवा की भावना: दत्तात्रेय होसबोले

आरएसएस महासचिव बोले— धर्म, स्वधर्म और हिंदू सम्मेलन समाज को जोड़ने और राष्ट्र निर्माण का माध्यम

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने कहा है कि देशभर में आयोजित किए जा रहे धर्म सम्मेलन, स्वधर्म सम्मेलन और हिंदू सम्मेलन समाज में एकता, सहयोग और राष्ट्र सेवा की भावना को मजबूत करने का कार्य कर रहे हैं। यह बातें उन्होंने धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही।

उन्होंने बताया कि इन सम्मेलनों का उद्देश्य केवल धार्मिक चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से समाज में नैतिक मूल्यों, परस्पर सहयोग और राष्ट्रीय चेतना को बढ़ावा देना भी है। होसबोले ने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाकर संवाद और समझ को बढ़ाना समय की आवश्यकता है।

आरएसएस महासचिव ने कहा कि जो लोग आध्यात्मिक साधना और समाज सेवा में जुड़े हैं, उन्हें राष्ट्र निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उनका मानना है कि जब व्यक्ति अपने कर्तव्यों को समझकर कार्य करता है, तभी समाज में स्थिरता और एकता मजबूत होती है।

उन्होंने यह भी कहा कि देश अनेक चुनौतियों और परिस्थितियों से गुजर रहा है, लेकिन सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि देश को एक मजबूत और विकसित राष्ट्र बनाया जा सके। ऐसे में धर्म सम्मेलनों की भूमिका समाज को जोड़ने में महत्वपूर्ण है।

दत्तात्रेय होसबोले ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किसी भी प्रकार के विभाजन या द्वेष को बढ़ावा नहीं देता, बल्कि इसका उद्देश्य समाज को एक सूत्र में पिरोकर राष्ट्र सेवा की भावना को आगे बढ़ाना है।

उन्होंने कहा कि इन सम्मेलनों में केवल धार्मिक विषय ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, नैतिक शिक्षा और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर भी गंभीर चर्चा की जाती है। यह प्रयास समाज को सकारात्मक दिशा देने और सामूहिक विकास को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है।

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