देश
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कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन: युवाओं की मांगों और राजनीतिक असंतोष का नया अध्याय
दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर “कॉकरोच जनता पार्टी” (CJP) के समर्थकों ने बड़ा प्रदर्शन किया, जिसका नेतृत्व अभिजीत दीपके ने…
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CM डीके शिवकुमार के पहले पांच फैसले क्या रहे? स्टूडेंट्स को फ्री बस पास, प्राइवेट जॉब एक्सचेंज, भारत जोड़ो युवा सभाओं को 10-10 लाख रुपये
कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पद संभालते ही अपनी पहली कैबिनेट बैठक में जनकल्याण से जुड़े पांच बड़े…
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‘शिष्यों का आध्यात्मिक प्रमुख भी होता है महंत’: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सरकार को नहीं सौंपा जा सकता प्रशासन
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में साफ किया है कि किसी भी आश्रम या मठ का महंत केवल…
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‘तारीख पर तारीख’ अब और नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्टों को दिए सख्त निर्देश, 3 महीने में सुनाना होगा रिजर्व फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक फैसलों में हो रही अनावश्यक देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए सभी हाईकोर्टों के लिए अहम दिशा-निर्देश दोहराए हैं। अदालत ने कहा कि जब किसी मामले की सुनवाई पूरी होकर फैसला सुरक्षित रख लिया जाए, तो उसे लंबे समय तक लटकाए रखना उचित नहीं है। कोर्ट के अनुसार, यदि तीन महीने के भीतर फैसला नहीं सुनाया जाता है, तो रजिस्ट्रार जनरल को मामला संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के सामने रखना होगा। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक आपराधिक अपील लगभग एक साल तक फैसला सुरक्षित रहने के बावजूद सूचीबद्ध नहीं की गई थी। सुप्रीम कोर्ट इस देरी को देखकर “हैरान और आश्चर्यचकित” हुआ और कहा कि ऐसे हालात न्यायिक प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा कमजोर करते हैं। कोर्ट ने पहले से मौजूद Anil Rai v. State of Bihar वाले सिद्धांतों को फिर से लागू करते हुए यह व्यवस्था दोहराई कि हर हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को समय समय पर उन मामलों की सूची मुख्य न्यायाधीश को देनी होगी, जिनमें फैसला सुरक्षित होने के बावजूद तीन महीने में नहीं सुनाया गया। अगर इसके बाद भी आदेश नहीं आता, तो मुख्य न्यायाधीश संबंधित पीठ को दो हफ्ते के भीतर फैसला सुनाने को कहेंगे; ऐसा न होने पर मामला किसी दूसरी पीठ को सौंपा जा सकता है। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि आदेश सुरक्षित रखने के बाद लंबे समय तक चुप्पी बनाए रखना सिर्फ प्रक्रियात्मक देरी नहीं, बल्कि न्याय से वंचित करने जैसा है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि कई हाईकोर्टों में ऐसा कोई प्रभावी तंत्र नहीं है, जिससे पक्षकार खुद देरी की शिकायत कर सकें। कुल मिलाकर, यह आदेश हाईकोर्टों के लिए एक सख्त प्रशासनिक संदेश है कि अब “तारीख पर तारीख” की आदत खत्म करनी होगी और सुरक्षित फैसलों को तय समयसीमा में सुनाना ही होगा।
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POCSO मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सुप्रीम कोर्ट से राहत, अग्रिम जमानत बरकरार
POCSO एक्ट से जुड़े एक मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत…
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पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में ₹2 लाख पर मिलेगा करीब ₹90 हजार ब्याज, जानिए पूरा गणित
अगर आप बिना जोखिम के सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न वाला निवेश विकल्प तलाश रहे हैं, तो पोस्ट ऑफिस की टाइम…
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तीन बार बढ़े दाम: भारत में अब कहां सबसे महंगा और कहां सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल?
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इस महीने लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। Reuters के मुताबिक, मई 2026 में…
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मार्को रुबियो ने पीएम मोदी को दिया व्हाइट हाउस का न्योता, दिल्ली में 1 घंटे चली अहम रणनीतिक बातचीत
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा इस समय भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से बेहद अहम मानी जा…
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सपा पार्षद को दिलानी होगी शपथ, BJP प्रत्याशी की SLP सुप्रीम कोर्ट से खारिज
लखनऊ नगर निगम के वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज (तृतीय) की पार्षदी को लेकर चल रहे विवाद में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी…
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राहुल गांधी का मोदी सरकार पर आर्थिक हमला
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने एक बार फिर प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्र सरकार की…
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