इथियोपिया क्यों कहता है अपने वीर राजाओं को ‘हिंदू राजन’? पीएम मोदी ने संसद में साझा किए सांस्कृतिक‑ऐतिहासिक संबंध
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इथियोपिया संसद में भाषण के दौरान भारत‑इथियोपिया के 2000‑साल पुराने रिश्तों और ‘हिंदू राजन’ की 500 साल पुरानी कहानी पर रोशनी — साझा इतिहास, व्यापार और संस्कृति ने रिश्तों को गहरा किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इथियोपिया की संसद को संबोधित करते हुए भारत और इथियोपिया के प्राचीन और विस्तृत सांस्कृतिक‑ऐतिहासिक संबंधों पर बल दिया। अपने अभिभाषण में उन्होंने इथियोपिया को “शेरों की धरती” कहा और दोनों देशों के बीच सदियों पुराने बंधन को याद किया।
इथियोपिया के इतिहास में “हिंदू राजन” शब्द का उल्लेख एक दिलचस्प कड़ी है। यह उपाधि 16वीं शताब्दी के आसपास के ऐतिहासिक घटनाक्रम से जुड़ी है, जब पुर्तगाली प्रभाव के खिलाफ संघर्ष के दौरान भारत के कालीकट के शासक आदित्य वर्मा प्रथम ने इथियोपिया की सहायता की थी। उस साहसिक समर्थन के लिए इथियोपियाई स्रोतों में उनके वीरता‑संबंधित शौर्य का सम्मान “हिंदू राजन” के रूप में किया गया — जिसका स्थानीय अर्थ था “शेरों की धरती का लड़ाका”।
इतिहासकारों के अनुसार, भारत‑इथियोपिया के बीच लाल सागर और हिंद महासागर के प्राचीन समुद्री मार्गों के जरिए व्यापार संबंध लगभग दो सहस्राब्दी पहले शुरू हो गए थे। अक्सुम साम्राज्य के व्यापारी भारत के मसालों, वस्त्रों और बहुमूल्य वस्तुओं के लिए प्रसिद्ध थे, वहीं भारत को अफ्रीकी सोना, हाथीदांत और अन्य समुद्री वस्तुएं मिलती थीं।
सांस्कृतिक दृष्टि से, इथियोपिया का प्रमुख ग्रंथ “केब्रा नागस्त” (Kebra Nagast) भारत और पूर्वी देशों के बारे में कई संदर्भ देता है, जिसमें भारत को समृद्ध, बुद्धिमत्ता और विविधता का स्रोत बताया गया है। इस ग्रंथ के वर्णनों ने भारतीय उपमहाद्वीप को एक बौद्धिक और व्यापारिक केंद्र के रूप में स्थापित किया, जिससे दोनों देशों के बीच समृद्धि और आदान‑प्रदान के बुनियादी आधार सुदृढ़ हुए।
आधुनिक कूटनीति के क्षेत्र में भारत और इथियोपिया ने औपचारिक सम्बन्ध 1948 से स्थापित किए और 1950 में इथियोपिया ने भारत में अपना पहला दूतावास खोला — यह किसी भी अफ्रीकी देश द्वारा न्यू‑दिल्ली में दूतावास खोलने वाला पहला कदम था। इसके बाद से दोनों देशों ने शिक्षा, प्रौद्योगिकी, व्यापार और सांस्कृतिक सहयोग सहित विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाया है।
आज भारत‑इथियोपिया रिश्ते केवल ऐतिहासिक दस्तावेजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साझेदारी, सम्मान और पारस्परिक सीख की भावना पर आधारित वास्तविक साझेदारी के रूप में विकसित हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन ने इसी साझा विरासत और भविष्य की संभावनाओं पर बल दिया है।



