स्टारलिंक पर जेलेंस्की के आरोपों से बढ़ी चिंता, भारत क्यों बरत रहा सतर्कता?
यूक्रेन में इंटरनेट गति सीमित करने का आरोप, ड्रोन संचालन पर असर का दावा; विदेशी तकनीक पर निर्भरता से राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के आरोपों के बाद स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को लेकर नई बहस छिड़ गई है। जेलेंस्की ने दावा किया कि यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की गति जानबूझकर सीमित की गई, जिससे अग्रिम मोर्चों पर ड्रोन संचालन और कुछ वायु रक्षा अभियानों पर असर पड़ा। हालांकि, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इन आरोपों को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए खारिज किया है।
इस विवाद ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से विदेशी तकनीक पर निर्भरता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। युद्ध के दौरान संचार, निगरानी और ड्रोन संचालन में सैटेलाइट इंटरनेट महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत के लिए भी यह मुद्दा अहम है। सीमावर्ती क्षेत्रों में संचार व्यवस्था की विश्वसनीयता, आंकड़ों की सुरक्षा और नेटवर्क पर नियंत्रण रणनीतिक प्राथमिकताएं हैं। स्टारलिंक जैसी सेवा दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट पहुंचा सकती है, लेकिन संकट के समय इसकी उपलब्धता को लेकर चिंताएं भी हैं। हालांकि, जेलेंस्की के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।





