दिल्ली-एनसीआर में रेप मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोला- अपराधियों के मन में कानून का डर जरूरी
नाबालिगों से जुड़ी तीन घटनाओं पर स्वतः संज्ञान, दिल्ली पुलिस से अपराध रोकने और सुरक्षा बढ़ाने को कहा
दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और नाबालिगों से जुड़े हालिया दुष्कर्म के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि अपराध रोकने के लिए पुलिस को प्रभावी कदम उठाने होंगे और अपराधियों के मन में कानून का डर होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि कार्रवाई केवल अपराध होने के बाद आरोपियों को पकड़ने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि अपराध की रोकथाम पर भी जोर देना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में हाल की तीन घटनाओं को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई की। इन मामलों में चलती बस में नाबालिग से कथित सामूहिक दुष्कर्म, स्वरूप नगर में नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या तथा आस्था कुंज पार्क में नाबालिग से कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना शामिल है। अदालत ने 28 सितंबर को इन घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लिया था।
पीठ ने दिल्ली पुलिस से कहा कि संवेदनशील और जोखिम वाले इलाकों में निगरानी, गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि महिलाओं को देर रात सड़क पर या सार्वजनिक परिवहन में सफर करते समय भी सुरक्षित महसूस होना चाहिए। कोर्ट ने पुलिस से अपराध की रोकथाम के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया।
इससे पहले 28 सितंबर की सुनवाई में भी सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई थी। अदालत ने कहा था कि खराब रोशनी, निगरानी की कमी और पर्याप्त गश्त नहीं होने के कारण सार्वजनिक स्थानों को जोखिम वाले क्षेत्र में बदलने की स्थिति नहीं आनी चाहिए। मामले में दिल्ली के मुख्य सचिव और पुलिस आयुक्त समेत संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट की यह सुनवाई दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चल रहे स्वतः संज्ञान मामले का हिस्सा है। अदालत ने पुलिस और प्रशासन से अपराधों की रोकथाम तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।





