हिमाचल में अक्तूबर में दिसंबर जैसी ठंड, कुकुमसेरी में पारा माइनस 0.4 डिग्री; बारिश-बर्फबारी का अलर्ट

पांच जिलों में अंधड़ का येलो अलर्ट, ऊंची चोटियों पर फिर बर्फबारी के आसार; 16 अक्तूबर तक खराब रह सकता है मौसम।

शिमला। हिमाचल प्रदेश में अक्तूबर महीने में ही सर्दी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। हालिया बारिश और बर्फबारी के बाद प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान तेजी से गिरा है। कई क्षेत्रों में दिसंबर जैसी ठंड महसूस होने लगी है। लाहौल-स्पीति के कुकुमसेरी में न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे पहुंचकर माइनस 0.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

मौसम के आंकड़ों के अनुसार, केलांग में न्यूनतम तापमान 0.7 डिग्री और ताबो में 1.4 डिग्री सेल्सियस रहा। कल्पा में 6 डिग्री, कुफरी में 7.1 डिग्री, मनाली में 7.4 डिग्री और शिमला में 10 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया। सुबह और शाम ठंड बढ़ने से लोगों ने गर्म कपड़े निकालने शुरू कर दिए हैं।

बारिश और बर्फबारी के फिर आसार

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के पूर्वानुमान के मुताबिक, मंगलवार यानी 13 अक्तूबर की देर शाम से प्रदेश में मौसम दोबारा बदल सकता है। मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है, जबकि ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हो सकती है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम में यह बदलाव आने के आसार हैं।

चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, शिमला और मंडी जिलों में मंगलवार और बुधवार के लिए अंधड़ का येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, 15 अक्तूबर को ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, सिरमौर और सोलन के मैदानी तथा आसपास के क्षेत्रों में बारिश होने की संभावना जताई गई है। पूर्वानुमान के अनुसार, 16 अक्तूबर तक मौसम खराब रह सकता है। इसके बाद 17 और 18 अक्तूबर से मौसम साफ होने की उम्मीद है।

नवंबर-दिसंबर में ज्यादा बारिश के आसार

मौसम वैज्ञानिक संदीप कुमार शर्मा के अनुसार, अक्तूबर में प्रदेश में सामान्य से कम बारिश हो सकती है, जबकि नवंबर और दिसंबर में सामान्य से अधिक बारिश की संभावना है। इस दौरान तापमान में भी गिरावट आ सकती है।

समय से पहले हुई बर्फबारी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कृषि और बागवानी के लिए फायदेमंद हो सकती है। इससे मिट्टी में नमी बनी रह सकती है और फलदार पौधों को लाभ मिल सकता है। हालांकि, भारी बर्फबारी और पाला कुछ फसलों को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।

मौसम में लगातार बदलाव को देखते हुए पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और यात्रा करने वालों को सावधानी बरतने तथा मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

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