200 साल पुराना रहस्यमयी मंदिर: जहां जिंदा सांपों से होता है शिवलिंग का श्रृंगार

कानपुर का श्री नंदेश्वर धाम, महाशिवरात्रि पर अद्भुत परंपरा और रंग बदलता स्वयंभू शिवलिंग बना आस्था का केंद्र

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में स्थित श्री नंदेश्वर धाम अपनी अनोखी धार्मिक परंपराओं और रहस्यमयी मान्यताओं के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। लगभग 200 वर्ष पुराने इस प्राचीन शिव मंदिर में महाशिवरात्रि के तीसरे दिन एक ऐसी परंपरा निभाई जाती है, जिसे देखकर श्रद्धालु अचंभित रह जाते हैं। यहां भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप वाले शिवलिंग का श्रृंगार जिंदा सांपों से किया जाता है।

महाशिवरात्रि पर जीवित सांपों से विशेष पूजा

यह मंदिर कानपुर के सरसौल विकासखंड के हाथीगांव में स्थित है। परंपरा के अनुसार, महाशिवरात्रि से पहले स्थानीय सपेरे जंगलों से सांप लाते हैं। पूजा के दिन पहले शिवलिंग को फूल, बेलपत्र और अन्य पारंपरिक सामग्री से सजाया जाता है। इसके बाद सांपों को सावधानीपूर्वक शिवलिंग के चारों ओर छोड़ा जाता है, जहां वे बिना किसी आक्रामकता के शिवलिंग से लिपट जाते हैं।

पूजा संपन्न होने के बाद सभी सांपों को सुरक्षित रूप से वापस जंगल में छोड़ दिया जाता है। कन्नौज निवासी अनुभवी सपेरे रामपाल नाथ बताते हैं कि सांपों को भगवान शिव का अभिन्न अंग माना जाता है, इसलिए इस परंपरा में किसी प्रकार का भय या खतरा नहीं होता।

परंपरा की शुरुआत और धार्मिक मान्यता

मंदिर समिति के अनुसार यह अनोखी रस्म पिछले करीब 27 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है। एक लोककथा के मुताबिक, वर्षों पहले यहां के एक किसान लाला ने गहरी श्रद्धा में अपनी जीभ काटकर शिवलिंग पर अर्पित कर दी थी। इसके बाद से इस मंदिर को स्वयंभू शिवलिंग की महिमा से जोड़ा गया और जीव-जंतुओं के साथ पूजा की परंपरा शुरू हुई।

दिन में तीन बार रंग बदलता शिवलिंग

श्री नंदेश्वर धाम की एक और बड़ी विशेषता यहां का स्वयंभू अर्धनारीश्वर शिवलिंग है, जो दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है।

  • सुबह: भूरा (ब्राउन) रंग

  • दोपहर: अधिक चमकदार और तेजस्वी

  • सूर्यास्त: हल्की आभा के साथ शांत स्वरूप

श्रद्धालु इसे भगवान शिव की दिव्य शक्ति का प्रमाण मानते हैं।

आस्था और आश्चर्य का संगम

हर साल महाशिवरात्रि पर हजारों श्रद्धालु इस अनोखे दृश्य के साक्षी बनने के लिए श्री नंदेश्वर धाम पहुंचते हैं। जीवित सांपों से शिवलिंग का श्रृंगार और रंग बदलता शिवलिंग—दोनों ही इस मंदिर को उत्तर भारत के सबसे रहस्यमयी और आस्था-प्रधान शिवधामों में शामिल करते हैं।

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