‘हम नहीं, चीन है रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार’, विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिका और यूरोप पर साधा निशाना

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने गुरुवार को अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा, हमें आपको मॉस्को में देखकर खुशी हो रही है। मुझे पता है कि आपका कल का दिन व्यस्त था। आपने उप प्रधानमंत्री डेनिस मांतुरोव के साथ व्यापार और आर्थिक मामलों की अंतर-सरकारी आयोग की बैठक की, जो सफल रही।

लावरोव ने कहा, मुझे उम्मीद है कि आज हमें राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा का अवसर मिलेगा। हम अपने संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी के रूप में देखते हैं और हमें उम्मीद है कि हम इन संबंधों को पूरी तरह सही ठहराएंगे।

उन्होंने आगे कहा, हम अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक नई व्यवस्था बनते हुए देख रहे हैं, जो एक बहुध्रुवीय व्यवस्था है। इसमें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ), ब्रिक्स और जी20 की भूमिका बढ़ती जा रही है और निश्चित रूप से संयुक्त राष्ट्र एक ऐसा मंच है, जहां सभी मौजूदा और भविष्य के शक्तिकेंद्र देश आपस में सहयोग, समझौते और संतुलित दृष्टिकोण से काम कर सकते हैं। रूस ऐसे संतुलित दृष्टिकोण का समर्थन करता है। मुझे आपसे मिलकर खुशी हो रही है और मुझे आज की चर्चाओं से अच्छे परिणाम की उम्मीद है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्या कहा
वहीं, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, आज की बैठक हमारे लिए एक अवसर है कि हम अपने राजनीतिक संबंधों पर चर्चा करें। साथ अपनी द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा भी करें।

जयशंकर ने कहा, मैं राजनीति, व्यापार, निवेश, रक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और लोगों के आपसी संबंधों पर विचारों के आदान-प्रदान की उम्मीद करता हूं। हमारे नेताओं ने पिछले साल जुलाई में 22वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में और फिर कजान मं मुलाकात की थी। अब हम साल के अंत में होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन की तैयारी कर रहे हैं। हमारे नेताओं ने हमेशा हमें विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने का मार्गदर्शन दिया है।

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