दिव्यांगों की गरिमा पर चोट बर्दाश्त नहीं—सुप्रीम कोर्ट का कड़ा संदेश
दिव्यांगों का मज़ाक उड़ाने पर बनेगा कड़ा कानून? केंद्र से जवाब तलब—कोर्ट ने कहा, “गरिमा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”; ऑनलाइन अपमान रोकने को स्वतंत्र संस्था की जरूरत, कॉमेडियंस को हर महीने दो सामाजिक कार्यक्रम करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगों और दुर्लभ आनुवांशिक बीमारियों से पीड़ित लोगों के खिलाफ की जाने वाली अपमानजनक व टिप्पणियों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से कहा है कि ऐसे मामलों के लिए एक **सख्त और विशेष कानून** बनाने पर तत्काल विचार किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि जातिसूचक अपमान के लिए एससी–एसटी एक्ट जैसे कठोर कानून मौजूद हैं, तो समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग—दिव्यांग नागरिकों—की गरिमा की रक्षा के लिए भी ऐसा ही मजबूत कानूनी ढांचा जरूरी है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस बात पर नाराज़गी जताई कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति असंवेदनशील और अपमानजनक कॉन्टेंट तेजी से बढ़ा है। कोर्ट ने कहा कि गरिमा पर चोट पहुँचाने वाला ऐसा व्यवहार “सिर्फ मज़ाक नहीं, बल्कि गहरी सामाजिक चोट” है, जिसे किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
बेंच ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह जल्द से जल्द ऐसे अपमानजनक कंटेंट को रोकने, हटाने और मॉनिटर करने के लिए **एक स्वतंत्र, तटस्थ और स्वायत्त निगरानी संस्था** बनाने पर भी विचार करे, ताकि सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर फैली असंवेदनशीलता और ट्रोलिंग पर प्रभावी नियंत्रण हो सके।
संबंधित याचिका उन कॉमेडियंस और डिजिटल क्रिएटर्स के खिलाफ थी, जिन्होंने वीडियो में दिव्यांगों और SMA जैसी दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों का मज़ाक उड़ाया था। कोर्ट ने इन कलाकारों को भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने की हिदायत दी, साथ ही सामाजिक दंड (Social Penalty) के तहत यह आदेश दिया कि वे हर महीने कम से कम दो कार्यक्रम आयोजित करें—जहाँ दिव्यांगों की प्रेरक कहानियाँ बताई जाएँ और इलाज व सहायता के लिए फंड जुटाया जाए।
कोर्ट ने केंद्र से यह भी कहा कि वह अपने प्रस्तावित दिशानिर्देश (Guidelines) सार्वजनिक रूप से जारी करे, ताकि पूरे समाज में इस मुद्दे पर जागरूकता बढ़े। मामले की अगली सुनवाई चार हफ्तों बाद होगी, जिसमें यह देखा जाएगा कि सरकार ने इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाए हैं।



