संघ के 100 वर्षों में भाऊराव देवरस का अहम योगदान: दीनदयाल उपाध्याय से लेकर भारत‑इज़राइल रिश्तों तक

आरएसएस के शताब्दी उत्सव की 100 कहानियों में शामिल भाऊराव देवरस — एक ऐसे स्वयंसेवक की यात्रा जिसने संगठनात्मक विस्तार, दीनदयाल उपाध्याय के शामिल होने और भारत‑इज़राइल संबंधों के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

देश के सबसे बड़े सामाजिक‑सांस्कृतिक संगठनों में से एक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), इस वर्ष अपने 100‑साल का महोत्सव मना रहा है। संघ ने अपने एक शताब्दी उत्सव की श्रृंखला में भाऊराव देवरस की कहानी को प्रमुखता से बताया है — एक ऐसे कार्यकर्ता जिन्होंने संगठन के विस्तार और प्रभाव को नई दिशा दी।

भाऊराव देवरस का सफर संघ में एक आदर्श स्वयंसेवक से लेकर राष्ट्रीय रणनीति और विचारों के शिल्पकार तक रहा। उत्तर प्रदेश के लखनऊ से शुरू हुए उनके संबंध ने संघ के प्रसार में अहम भूमिका निभाई। वे न केवल उत्तर प्रदेश में संघ की मजबूत नींव रखने वाले प्रमुख कार्यकर्ताओं में रहे, बल्कि बिहार, बंगाल और पूर्वोत्तर तक संगठन की पहुँच बढ़ाने में भी सक्रिय रहे।

एक महत्वपूर्ण मोड़ उनकी दीनदयाल उपाध्याय के साथ सहभागिता थी। दीनदयाल धीरे‑धीरे संघ के विचारों से प्रभावित हुए और उन्होंने संघ के विचारों को आगे बढ़ाने में हाथ बंटाया। भाऊराव ने दीनदयाल की प्रतिभा और नेतृत्व को पहचानते हुए उन्हें बड़े ज़िम्मेदार पदों पर काम करने का अवसर दिया।

भाऊराव देवरस की भूमिका केवल संगठनात्मक विस्तार तक सीमित नहीं रही। भारत और इज़राइल के बीच कूटनीतिक रिश्तों को सशक्त करने में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। संघ के विचार के अनुरूप कि इज़राइल भारत का “प्राकृतिक मित्र” होना चाहिए, उन्होंने भारतीय यहूदियों और इज़राइल के बीच संपर्क बनाए रखा और तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव को प्रभावित किया कि भारत को इज़राइल के साथ पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने चाहिए। जनवरी 1992 में भारत ने इज़राइल में अपना दूतावास खोला, जिसे कई विशेषज्ञ संघ की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं।

उनकी यह भूमिका कम चर्चित रही है, लेकिन संघ‑भारतीय राजनीति और विदेश नीति के बुनियादी पड़ावों को समझने के लिए यह एक महत्वपूर्ण अध्याय है। भाऊराव देवरस जैसे स्वयंसेवकों की सक्रियता ने संघ को अपने शताब्दी वर्ष तक भारत के सामाजिक‑सांस्कृतिक परिदृश्य में एक प्रभावशाली संगठन के रूप में स्थापित किया।

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