ईरान के खामेनेई ने युद्ध के खतरे में भी बंकर जाने से किया इंकार

सुरक्षा टीम की सलाह ठुकराई, कहा—जब तक 9 करोड़ नागरिक सुरक्षित नहीं, मैं भी नहीं जाऊँगा

नई दिल्ली: भारत में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के विशेष प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने खुलासा किया कि अमेरिका और इस्राइल के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद खामेनेई ने अपने घर छोड़कर सुरक्षित बंकर में जाने से साफ इंकार कर दिया।

डॉ. इलाही के अनुसार, सुरक्षा अधिकारियों ने कई बार अनुरोध किया कि खामेनेई किसी गुप्त स्थान पर चले जाएँ क्योंकि उनका घर और दफ्तर सबको पता था, जिससे हमला होने का खतरा अधिक था। लेकिन 37 वर्षों से देश की कमान संभाल रहे खामेनेई ने कहा कि जब तक ईरान के 9 करोड़ नागरिकों के लिए सुरक्षित शेल्टर का इंतजाम नहीं होगा, वे स्वयं के लिए किसी बंकर में नहीं जाएंगे।

सुप्रीम नेता ने अपने लिए किसी विशेष सुविधा की अनुमति भी नहीं दी। उनके परिवार ने बताया कि खामेनेई का मानना है कि एक नेता को हमेशा अपनी जनता और गरीबों के बराबर रहना चाहिए। यदि कोई नेता अपने लिए अलग और सुरक्षित जीवन जीने लगे, तो वह देश का नेतृत्व करने के योग्य नहीं रहता।

इसके साथ ही, डॉ. इलाही ने इस्लामी शिक्षाओं में शहादत के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि खामेनेई शहादत को सर्वोच्च सम्मान मानते हैं और यही वजह है कि मौत का खतरा होने के बावजूद उन्होंने सादगी और जनता के साथ खड़े रहने का फैसला किया।

निष्कर्ष: खामेनेई का यह कदम उनकी सादगी, जनता के प्रति समर्पण और इस्लामी मूल्यों पर आधारित नेतृत्व की छवि को स्पष्ट करता है।

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