ओवैसी का केंद्र पर निशाना: विदेश नीति से लेकर घरेलू मुद्दों तक उठाए सवाल
असदुद्दीन ओवैसी ने नरेंद्र मोदी की नीतियों पर साधा निशाना, ईरान युद्ध, खाड़ी देशों में भारतीयों और दिल्ली विवाद को लेकर जताई चिंता

रमज़ान के आखिरी जुमे के मौके पर हैदराबाद की ऐतिहासिक मक्का मस्जिद में आयोजित जलसे को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों मुद्दों पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
ईरान-अमेरिका-इज़रायल के बीच बढ़ते तनाव का जिक्र करते हुए ओवैसी ने भारत की विदेश नीति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि भारत पूरी तरह तटस्थ रुख अपनाता, तो वैश्विक मंच पर उसकी आवाज और प्रभाव अधिक मजबूत होता।
ओवैसी ने खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा और हितों को लेकर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, लगभग एक करोड़ भारतीय इन देशों में काम करते हैं और देश के विदेशी मुद्रा भंडार में उनका बड़ा योगदान है। ऐसे में मौजूदा भू-राजनीतिक संकट के बीच उनकी सुरक्षा और कल्याण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
आर्थिक मुद्दों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत का सामरिक पेट्रोलियम भंडार सीमित है और लंबे समय तक संकट झेलने के लिए पर्याप्त नहीं है। साथ ही, उन्होंने कृषि निर्यात, विशेषकर बासमती चावल और फलों के निर्यात में आ रही बाधाओं पर भी चिंता जताई।
दिल्ली के उत्तम नगर विवाद का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कुछ लोगों पर रोज़ा इफ्तार के मामले में दर्ज मुकदमे की आलोचना की और इसे भेदभावपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई कानून की समानता के सिद्धांत के खिलाफ है और इससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित होता है।
इसके अलावा, उन्होंने बेरोज़गारी, आवास भेदभाव और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। ओवैसी ने दावा किया कि इन विषयों पर गंभीर चर्चा और संतुलित नीति की जरूरत है, ताकि सभी वर्गों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
कुल मिलाकर, उनका यह संबोधन मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर एक व्यापक टिप्पणी के रूप में सामने आया, जिसमें उन्होंने सरकार से अधिक संवेदनशील और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की मांग की।




