ग्लोबल स्तर पर भारत का दबदबा, 56% हिस्सेदारी के साथ बना नंबर-1
नागोया प्रोटोकॉल के तहत IRCC प्रमाणपत्र जारी करने में भारत ने दुनिया को पीछे छोड़ा, पर्यावरणीय नेतृत्व में बढ़ी साख

भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए बड़ा मुकाम हासिल किया है। नागोया प्रोटोकॉल के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अनुपालन प्रमाणपत्र (IRCC) जारी करने के मामले में भारत दुनिया का अग्रणी देश बन गया है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, एबीएस क्लियरिंग-हाउस में दर्ज कुल 6,311 वैश्विक प्रमाणपत्रों में से 3,561 प्रमाणपत्र अकेले भारत ने जारी किए हैं, जो लगभग 56 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। इस उपलब्धि के साथ भारत ने अन्य सभी देशों को काफी पीछे छोड़ दिया है और वैश्विक नेतृत्व की भूमिका में आ गया है।
इस सूची में दूसरे स्थान पर फ्रांस है, जिसने 964 प्रमाणपत्र जारी किए हैं। इसके बाद स्पेन, अर्जेंटीना, पनामा और केन्या जैसे देश आते हैं। कुल मिलाकर 142 देशों में से केवल 34 देशों ने ही IRCC जारी करने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी दिखाई है।
नागोया प्रोटोकॉल एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसका उद्देश्य जैविक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के उपयोग में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। इसके तहत जारी किए जाने वाले IRCC प्रमाणपत्र इस बात का प्रमाण होते हैं कि किसी भी संसाधन के उपयोग से पहले आवश्यक सहमति और शर्तों पर समझौता कर लिया गया है।
भारत की यह उपलब्धि उसके मजबूत कानूनी और प्रशासनिक ढांचे को दर्शाती है। देश में इस प्रक्रिया को राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, राज्य जैव विविधता बोर्ड और स्थानीय प्रबंधन समितियों के माध्यम से प्रभावी रूप से लागू किया गया है।
इस सुव्यवस्थित प्रणाली ने न केवल प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय दायित्वों के पालन में भी भारत को एक जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है।
यह उपलब्धि वैश्विक पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता प्रबंधन में भारत की बढ़ती भूमिका को और मजबूत करती है, जिससे देश की अंतरराष्ट्रीय साख में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।





