CM हिमंता का इंटरनेशनल जलवा: शपथ ग्रहण में US राजदूत और सिंगापुर हाई कमिश्नर की मौजूदगी ने बढ़ाई शान
असम में हिमंता बिस्वा सरमा के दूसरे कार्यकाल के शपथ ग्रहण समारोह में अमेरिकी राजदूत और विदेशी डिप्लोमैट्स की मौजूदगी—कूटनीतिक ताकत और वैश्विक रिश्तों का बड़ा संदेश
असम की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने शपथ ग्रहण समारोह के जरिए न सिर्फ राज्य बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियां बटोरी हैं। उनके दूसरे कार्यकाल के शपथ ग्रहण समारोह में अमेरिकी राजदूत, सिंगापुर के उच्चायुक्त समेत कई विदेशी डिप्लोमैट्स की मौजूदगी ने इस आयोजन को “इंटरनेशनल पावर शो” में बदल दिया।
यह समारोह केवल एक राजनीतिक शपथ ग्रहण नहीं, बल्कि भारत के पूर्वोत्तर राज्य की बढ़ती वैश्विक पहचान का भी प्रतीक माना जा रहा है।
विदेशी मेहमानों की मौजूदगी क्यों अहम?
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका के राजदूत और सिंगापुर के उच्चायुक्त की उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि असम अब केवल एक राज्य नहीं, बल्कि निवेश और रणनीतिक साझेदारी के लिए एक उभरता हुआ केंद्र बन रहा है।
इस तरह की मौजूदगी आमतौर पर बड़े राष्ट्रीय या वैश्विक आयोजनों में देखने को मिलती है, जिससे इस कार्यक्रम का महत्व और बढ़ गया।
हिमंता सरकार की ‘ग्लोबल पिच’
पिछले कुछ वर्षों में हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार ने असम को विदेशी निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का केंद्र बनाने की कोशिश की है।
टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किल डेवलपमेंट और व्यापार जैसे क्षेत्रों में विदेशी साझेदारों के साथ बातचीत लगातार बढ़ी है।
इसी कड़ी में सिंगापुर और अन्य देशों के प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी को एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
शपथ ग्रहण में शक्ति प्रदर्शन
गुवाहाटी में हुए इस भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित कई बड़े नेता भी मौजूद रहे।
इसके साथ ही विदेशी डिप्लोमैट्स की उपस्थिति ने इस आयोजन को एक “पावर डिप्लोमेसी शो” का रूप दे दिया।
राजनीतिक संदेश क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह शपथ ग्रहण केवल सरकार गठन का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह संदेश देने का मंच भी था कि असम अब विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
अमेरिका और सिंगापुर जैसे देशों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि पूर्वोत्तर भारत अब वैश्विक निवेश मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है।
विपक्ष और चर्चा
हालांकि विपक्ष इसे केवल “प्रोटोकॉल कार्यक्रम” बता रहा है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे सरकार की कूटनीतिक सफलता और छवि निर्माण के रूप में देखा जा रहा है।
निष्कर्ष
हिमंता बिस्वा सरमा का यह शपथ ग्रहण समारोह सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय संदेश भी बन गया है।
विदेशी राजनयिकों की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि असम अब स्थानीय राजनीति से आगे बढ़कर वैश्विक साझेदारी और रणनीतिक महत्व की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।





