राहुल गांधी का मोदी सरकार पर आर्थिक हमला
राहुल गांधी ने महंगाई, ईंधन संकट, नॉर्वे पेंशन फंड और आर्थिक नीतियों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर गंभीर सवाल उठाए, सरकार पर उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया।

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने एक बार फिर प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोला है। नॉर्वे के सरकारी पेंशन फंड, बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल कीमतों में इजाफा और देश की आर्थिक स्थिति को लेकर राहुल गांधी ने कहा कि देश एक बड़े “आर्थिक तूफान” की ओर बढ़ रहा है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने बयान में दावा किया कि सरकार की नीतियों का सबसे ज्यादा लाभ चुनिंदा उद्योगपतियों को मिल रहा है, जबकि आम जनता महंगाई और बेरोजगारी से परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आम लोगों की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय बड़े कॉरपोरेट समूहों को फायदा पहुंचाने में लगी हुई है। कांग्रेस लंबे समय से केंद्र सरकार पर “क्रोनी कैपिटलिज्म” यानी पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाली राजनीति का आरोप लगाती रही है।
यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान वहां के सरकारी पेंशन फंड और भारत में उसके निवेश को लेकर चर्चाएं तेज हुईं। नॉर्वे का गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल दुनिया के सबसे बड़े संप्रभु संपत्ति कोषों में शामिल है और भारतीय बाजार में उसका निवेश लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, इस फंड का भारत में लगभग 28 अरब डॉलर का निवेश है।
राहुल गांधी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक केवल आर्थिक आंकड़ों को नहीं देखते, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं, प्रेस स्वतंत्रता और राजनीतिक स्थिरता को भी महत्व देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की कार्यशैली और संस्थागत दबाव के कारण भारत की वैश्विक छवि प्रभावित हो रही है। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि दुनिया अब भारत में लोकतांत्रिक माहौल को लेकर सवाल उठा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान एक नॉर्वेजियन पत्रकार द्वारा पूछे गए सवाल को लेकर भी राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि जब दुनिया भारत के प्रधानमंत्री को सवालों से बचते हुए देखती है तो इससे देश की छवि प्रभावित होती है। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा कि दुनिया “घबराए हुए प्रधानमंत्री” को देख रही है।
नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग द्वारा प्रधानमंत्री से प्रेस स्वतंत्रता को लेकर सवाल पूछे जाने के बाद यह विवाद और बढ़ गया। बाद में पत्रकार ने राहुल गांधी से भी संपर्क कर बातचीत की इच्छा जताई। इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी चर्चा पैदा कर दी।
राहुल गांधी ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार आम लोगों से “त्याग” की अपील कर रही है, लेकिन खुद आर्थिक संकट से निपटने में विफल रही है। राहुल गांधी ने दावा किया कि सरकार के पास महंगाई और आर्थिक दबाव से निपटने के लिए ठोस रणनीति नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि लोगों से सोना न खरीदने, ईंधन कम इस्तेमाल करने और विदेश यात्राएं टालने की अपील की जा रही है, तो यह आर्थिक संकट की गंभीरता को दर्शाता है। राहुल गांधी के अनुसार, सरकार की नीतियों का बोझ अब सीधे आम जनता पर डाला जा रहा है।
कांग्रेस नेता ने नोटबंदी और जीएसटी का भी जिक्र करते हुए कहा कि इन फैसलों ने छोटे व्यापारियों, किसानों और मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नीतियों से बड़े उद्योगपतियों को फायदा मिला जबकि छोटे कारोबार कमजोर हुए। राहुल गांधी पहले भी कई बार नोटबंदी को “आर्थिक आपदा” बता चुके हैं।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि देश में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है और युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार, सरकार केवल प्रचार और छवि निर्माण में व्यस्त है, जबकि वास्तविक आर्थिक समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। कांग्रेस का दावा है कि महंगाई और बेरोजगारी ने मध्यम वर्ग और गरीब तबके की स्थिति को और कठिन बना दिया है।
दूसरी ओर भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि वैश्विक आर्थिक संकट और पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। सरकार समर्थकों ने कहा कि भारत में रिकॉर्ड विदेशी निवेश आ रहा है और दुनिया की बड़ी कंपनियां भारत को निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में देख रही हैं।
भाजपा का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की अपील जिम्मेदार आर्थिक व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए थी और विपक्ष उसे गलत तरीके से पेश कर रहा है। सरकार समर्थकों ने दावा किया कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचा विकास और विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ोतरी देश की मजबूत आर्थिक स्थिति को दिखाती है।
हालांकि कांग्रेस लगातार यह दावा कर रही है कि आर्थिक विकास के आंकड़े जमीन पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। पार्टी का कहना है कि अमीर और गरीब के बीच की खाई बढ़ रही है और सरकार आर्थिक असमानता को कम करने में विफल रही है। राहुल गांधी पहले भी कई बार अडाणी समूह को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठा चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट, बढ़ती ईंधन कीमतें और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है। विपक्ष महंगाई और आर्थिक प्रबंधन के मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है, जबकि सरकार अपनी विकास योजनाओं और निवेश आंकड़ों को सामने रख रही है।
कुल मिलाकर, नॉर्वे पेंशन फंड, आर्थिक संकट, महंगाई और अंतरराष्ट्रीय छवि को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुका है। राहुल गांधी लगातार सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि भाजपा इसे विपक्ष की नकारात्मक राजनीति बता रही है। आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर यह मुद्दा और अधिक गरमाने की संभावना है।





