आरबीआई ने बढ़ाया रेपो रेट, 5.25 से 5.50 प्रतिशत हुआ; महंगे हो सकते हैं लोन
फरवरी 2023 के बाद पहली बार बढ़ी ब्याज दर, महंगाई का दबाव बढ़ने के बीच लिया गया फैसला
दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी। इसके साथ रेपो रेट 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गया है। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब आरबीआई ने रेपो रेट में बढ़ोतरी की है।
आरबीआई का यह फैसला बढ़ती महंगाई और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के बीच आया है। अगस्त में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82 प्रतिशत पहुंच गई थी, जो लगातार तीसरे महीने आरबीआई के चार प्रतिशत के मध्यम अवधि लक्ष्य से ऊपर रही। केंद्रीय बैंक ने महंगाई के दबाव को देखते हुए अपनी मौद्रिक नीति का रुख भी ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ यानी चरणबद्ध सख्ती की ओर किया है।
रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर बैंकों से मिलने वाले कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। बैंक यदि इस बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों पर डालते हैं तो होम लोन, वाहन ऋण और व्यक्तिगत ऋण की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। इससे नई ईएमआई महंगी होने के साथ मौजूदा फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की मासिक किस्त भी बढ़ने की संभावना है। हालांकि इसका वास्तविक असर अलग-अलग बैंकों की दरों और कर्ज की शर्तों पर निर्भर करेगा।
आरबीआई ने महंगाई के साथ आर्थिक विकास को लेकर भी सकारात्मक अनुमान जताया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर का अनुमान 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत किया गया है। जून तिमाही में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही थी।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार आगे के फैसले महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे। केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया है कि निकट अवधि में अगला कदम दरों में एक और बढ़ोतरी या उन्हें स्थिर रखने के रूप में हो सकता है।




