होर्मुज के बाद मलक्का स्ट्रेट पर टोल की चर्चा, लेकिन पीछे हट गया इंडोनेशिया

वित्त मंत्री के बयान से मचा वैश्विक हड़कंप, विदेश मंत्री ने साफ किया रुख—अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ नहीं होगा कोई फैसला

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों से टोल वसूली की खबरों के बीच अब दुनिया की सबसे व्यस्त समुद्री लाइनों में से एक—मलक्का स्ट्रेट—को लेकर भी बड़ा विवाद खड़ा हो गया। इंडोनेशिया के वित्त मंत्री पुरबाया युधी सदेवा के एक बयान ने यह अटकलें तेज कर दीं कि क्या अब यह देश भी जहाजों से गुजरने का शुल्क वसूलने जा रहा है।

दरअसल, वित्त मंत्री ने हाल ही में यह सवाल उठाया था कि क्या मलक्का स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लिया जाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया जब ईरान पहले ही होर्मुज में टोल वसूली की दिशा में कदम बढ़ा चुका है, जिससे वैश्विक व्यापार पर असर की आशंका बढ़ गई है।

हालांकि, इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई। ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों ने इसे लेकर गंभीर सवाल उठाए, क्योंकि मलक्का स्ट्रेट एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व को जोड़ने वाला सबसे अहम समुद्री रास्ता है।

स्थिति स्पष्ट करने के लिए इंडोनेशिया के विदेश मंत्री सुगियोनो सामने आए और उन्होंने साफ कहा कि सरकार का ऐसा कोई इरादा नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि मलक्का स्ट्रेट पर टोल लगाना न तो उचित होगा और न ही अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप।

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में “फ्री नेविगेशन” यानी स्वतंत्र आवाजाही का अधिकार होता है। ऐसे में किसी एक देश द्वारा टोल वसूली करना नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।

मलक्का स्ट्रेट की अहमियत समझना जरूरी है। यह लगभग 900 किलोमीटर लंबा जलमार्ग है, जिससे होकर हर साल लाखों जहाज गुजरते हैं। यह मार्ग वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा संभालता है और खासकर चीन, जापान और भारत जैसे देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

हाल के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में इस स्ट्रेट से 1 लाख से ज्यादा जहाज गुजरे, जो इसकी रणनीतिक और आर्थिक अहमियत को दिखाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यहां टोल लागू होता, तो वैश्विक व्यापार की लागत बढ़ जाती और तेल तथा अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर सीधा असर पड़ता। लेकिन इंडोनेशिया के स्पष्टीकरण के बाद फिलहाल इस आशंका पर विराम लग गया है।

कुल मिलाकर, मलक्का स्ट्रेट में टोल वसूली की चर्चा भले ही तेज हुई हो, लेकिन अभी तक यह सिर्फ एक सुझाव या बयान तक ही सीमित है। इंडोनेशिया ने साफ कर दिया है कि वह ईरान की राह पर नहीं चलेगा और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करेगा।

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