सरकार का बड़ा फैसला: अब हर 15 दिन में होगा पेट्रोल-डीजल कीमतों का रिव्यू
एक्साइज ड्यूटी में बदलाव और कच्चे तेल की स्थिति को देखते हुए नई समीक्षा व्यवस्था लागू, उद्योगों और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली में केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक महत्वपूर्ण और नीतिगत बदलाव की घोषणा की है। अब देश में ईंधन की कीमतों की समीक्षा हर 15 दिनों में की जाएगी। इस फैसले का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच संतुलन बनाए रखना और तेल कंपनियों के वित्तीय दबाव को कम करना है।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के चेयरमैन के अनुसार, यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है ताकि उपभोक्ताओं पर अचानक कीमतों का बोझ न पड़े और सरकारी राजस्व भी संतुलित बना रहे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि एक्साइज ड्यूटी में संशोधन कर पेट्रोल और डीजल की दरों को नियंत्रित करने की कोशिश की गई है।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, देश में कच्चे तेल की आपूर्ति फिलहाल पर्याप्त है और अगले कुछ महीनों के लिए भंडार सुरक्षित स्थिति में है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह भी बताया कि एलपीजी और PNG की सप्लाई सामान्य रूप से जारी है और देश में प्रतिदिन हजारों नए कनेक्शन दिए जा रहे हैं।
हालांकि वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधाओं के कारण ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है, लेकिन भारत की रिफाइनरियां अपनी क्षमता से अधिक उत्पादन कर रही हैं ताकि घरेलू मांग पूरी की जा सके।
सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये तक की कटौती की है, जिससे घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी। इसके तहत पेट्रोल पर संशोधित शुल्क 21.90 रुपये से घटाकर 11.09 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 17.8 रुपये से घटाकर 7.8 रुपये प्रति लीटर किया गया है।
सरकार का अनुमान है कि इस नई 15-दिनीय समीक्षा प्रणाली से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि हर पखवाड़े लगभग 1500 करोड़ रुपये का राजस्व संतुलन भी संभव होगा। यह नीति आने वाले समय में ईंधन बाजार को अधिक स्थिर और नियंत्रित बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।





