संसद में ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा, पीएम मोदी ने गहन ऐतिहासिक महत्व पर जोर दिया

नई दिल्ली: शीतकालीन सत्र के आठवें दिन लोकसभा में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर विस्तार से चर्चा हुई। इस चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। वहीं, राज्यसभा में यह चर्चा मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होगी।
सत्र की शुरुआत में राज्यसभा में पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल को श्रद्धांजलि दी गई। प्रश्नकाल के बाद पीएम मोदी ने लोकसभा में अपने संबोधन में वंदे मातरम को “शक्ति और चेतना का प्रवाह” बताते हुए कहा कि इसने स्वतंत्रता संग्राम में करोड़ों भारतीयों को प्रेरित किया।
पीएम मोदी के मुख्य बिंदु:
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पीएम मोदी ने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं बल्कि गुलामी के खिलाफ और भारत की सांस्कृतिक गौरव की पुनर्जन्म की लड़ाई का प्रतीक रहा।
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उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस और पंडित जवाहरलाल नेहरू के बीच के ऐतिहासिक पत्राचार का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर मुस्लिम लीग के दबाव में समझौता करने का आरोप लगाया।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीतिक विवादों और दबावों के बावजूद वंदे मातरम हमेशा जनता के दिलों में जीवित रहा।
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देश ने आपातकाल जैसे समय में भी हर बार दमन को पीछे छोड़ते हुए आगे बढ़ा, इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने संसद के दोनों सदनों में सकारात्मक चर्चा की आशा व्यक्त की।
सांसदों की प्रतिक्रियाएं:
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कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने पीएम के भाषण और वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में वंदे मातरम के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आजादी से पहले गीत के प्रचार में ग्रामोफोन के अलावा पम्पलेट और प्रिंटेड दस्तावेजों का भी महत्वपूर्ण योगदान था।
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समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल हर चीज़ पर कब्जा करना चाहता है, और वंदे मातरम ने हमेशा लोगों को जोड़ने का काम किया।
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तृणमूल कांग्रेस सांसद काकोली घोष दास्तिदार ने नागरिक अधिकारों और भाषाई विविधता पर जोर देते हुए कहा कि इतिहास को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने चाहिए। उन्होंने अपने संबोधन का अंत “जय बंगला” के नारे से किया।
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डीएमके सांसद ए. राजा ने देश की विविधता में एकता की ताकत का उल्लेख किया और राष्ट्रगान व राष्ट्रीय गीत में अंतर स्पष्ट किया।
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कांग्रेस सांसद गोगोई ने विमानन क्षेत्र में उपजे इंडिगो संकट का उदाहरण देते हुए देशहित और राष्ट्रभक्ति की भावना पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री के संबोधन और सांसदों की प्रतिक्रियाओं के माध्यम से संसद में वंदे मातरम के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व पर गहन चर्चा हुई। यह सत्र देश के राष्ट्रीय प्रतीकों की महत्ता और एकता में उनकी भूमिका को याद करने का अवसर भी साबित हुआ।


