डोंगरगढ़ की पंचमी भेंट यात्रा: आस्था, परंपरा और इतिहास का भव्य संगम
माँ बम्लेश्वरी दरबार में उमड़ा जनसैलाब, सदियों पुरानी परंपरा ने फिर जगाई श्रद्धा

डोंगरगढ़, 24 मार्च — छत्तीसगढ़ के Dongargarh में नवरात्रि की पंचमी के अवसर पर आयोजित पंचमी भेंट यात्रा ने इस वर्ष आस्था, संस्कृति और इतिहास का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। आदिवासी गोंड समाज की इस प्राचीन परंपरा में सैकड़ों श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए और ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य जुलूस निकालते हुए Maa Bamleshwari Temple पहुंचे।
इस बार की यात्रा की खास बात रही खैरागढ़ राजपरिवार से जुड़ी प्राचीन राजसी तलवार, जिसे श्रद्धापूर्वक माता के दरबार में लाया गया। यह तलवार न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास से भी जुड़ी हुई है।
मंदिर परिसर को 601 किलो फलों से सजाया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्ति और सौंदर्य से सराबोर नजर आया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ सुबह से ही दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। भेंट यात्रा बूढ़ादेव स्थल से प्रारंभ होकर मंदिर तक पहुंची, जहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
गोंड समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार, पंचमी भेंट यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और हर नवरात्र में पूरे उत्साह से निभाई जाती है।
इतिहास के अनुसार, भोसले काल में राजा घासीदास वैष्णव को उनकी वीरता के कारण यह राजसी तलवार प्रदान की गई थी, जो आज भी राजपरिवार के पास सुरक्षित है।
आजादी के बाद मंदिर के संचालन के लिए ट्रस्ट का गठन किया गया, जो अब तक व्यवस्थाओं को संभाल रहा है। यह आयोजन न केवल श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी है।

