14 साल बाद ‘जिंदा’ हुआ 80 साल का बुजुर्ग: पन्ना में प्रशासन की चूक से खोई जमीन और पहचान वापस मिली
मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में सरकारी रिकॉर्ड में 14 वर्ष पहले मृत घोषित किए गए 80‑ वर्षीय भूरा आदिवासी ने वर्षों की लड़ाई के बाद अपनी जिंदगी और जमीन दोनों वापस पाई — मंत्री के सामने रोते हुए पैर पकड़ने के बाद प्रशासन ने सुधार किया।

मध्यप्रदेश के पन्ना जिले से एक हैरान कर देने वाला प्रशासनिक मामला सामने आया है, जिसमें 80 वर्षीय भूरा आदिवासी को सरकारी दस्तावेजों में 14 साल पहले मृत बताया गया था, जबकि वह जीवित थे और 11 साल तक अपनी पहचान वापस पाने की कोशिश करते रहे। यह मामला ग्राम पंचायत जनवार का है, जहाँ भूरा को लंबे समय तक गांव न होने के कारण पटवारी और तहसील स्तर पर फौती (मृत) घोषित कर दिया गया और उसके नाम की जमीन अपनी ही सत्यता खो बैठी। इसके बाद जमीन के दस्तावेज उसके बेटों के नाम दर्ज किए गए, और एक हिस्सा बेच भी दिया गया।भूरा ने कलेक्टर, नेताओं और ग्राम स्तर के अधिकारियों को अपनी ज़िंदगी का सबूत और न्याय की गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। स्थिति तब बदल गई जब पन्ना के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार के सामने भूरा ने अपने पैरों में गिरकर अपनी व्यथा सुनाई। मंत्री के संज्ञान में आते ही प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की और भूरा के जीवित होने की पुष्टि की।
न्याय की लंबी लड़ाई और जीत
जांच के पश्चात प्रशासन ने अपनी गलती मानते हुए 15 दिसंबर 2025 को भूरा को सरकारी रिकॉर्ड में पुनः ‘जीवित’ दर्ज किया तथा पहले बेच दी गई जमीन की रजिस्ट्री को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया। SDM संजय कुमार नागवंशी ने खुद जमीन वापस देने के आदेश जारी किए। भूरा को अब उनकी जमीन और पहचान फिर से हासिल हो गई है। भूरा के संघर्ष और प्रशासन की इस चूक ने ग्रामीण प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जांच‑पड़ताल, दस्तावेज़ी प्रमाण और सही रिकॉर्ड‑कीपिंग की आवश्यकता को उजागर किया है। इस तरह के मामलों से आशय यह भी है कि सरकारी दस्तावेजों में हुई त्रुटियाँ किसी के आधारभूत अधिकारों और आज़ादी को प्रभावित कर सकती हैं।

