Lucknow में ‘आतंकी फंडिंग’ का झूठा आरोप लगाकर बुजुर्ग महिला को ‘डिजिटल अरेस्ट’— पुलिस ने 1.5 करोड़ की FD रक्षात्मक रूप से रोकी

Lucknow के विकासनगर इलाके में साइबर ठगों (cyber fraudsters) ने एक 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला को शिकार बनाया, जब उन्होंने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर उसे “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर मानसिक दबाव में डाल दिया। ठगों ने कहा कि महिला का आधार कार्ड और मोबाइल नंबर आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में उपयोग हुआ है, जिससे वह फंस चुकी है।
यह धोखाधड़ी 11 दिसंबर से 15 दिसंबर तक चली, जिसमें साइबर अपराधियों ने महिला को रोज़ाना व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर सरकारी वर्दीधारी अधिकारियों और नकली अधिकारियों का सीन दिखाकर डराया। महिला को यह कहा गया कि वह घर से बाहर न निकले, परिवार से बात न करें और सभी निर्देशों का पालन करें, वरना उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
इस दौरान ठगों ने महिला से उसके आधार, बैंक और अन्य निजी दस्तावेज हासिल कर लिए और उसे अपने लगभग 1.5 करोड़ रुपये की जमा राशि (fixed deposit) को तोड़कर “सेफ अकाउंट” में ट्रांसफर करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
हालाँकि, विकासनगर थाना प्रभारी (SHO) आलोक सिंह की सतर्कता ने समय रहते उक्त ठगी को रोका। जब महिला बैंक में FD तोड़ने पहुंची तो अधिकारियों को शंका हुई। पुलिस ने उन्हें समझाया कि वे साइबर अपराध का शिकार हो रही हैं और तुरंत बैंक व संबंधित खातों को फ्रीज कराया। करीब ₹1.21 करोड़ की FD की निकासी रुकवाई गई और अन्य खातों को सुरक्षित किया गया। र फ्रॉड के बारे में विस्तृत जानकारी दी और साइबर सेल को ठगों के डिजिटल ट्रेल और मोबाइल आंकड़ों को सौंपते हुए आगे की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी या धन की मांग नहीं करती, इसलिए ऐसे किसी भी कॉल, संदेश या दबाव की स्थिति में पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को तुरंत सूचित करें।




