लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संभाला आसन, सदन की गरिमा और निष्पक्षता पर जताई प्रतिबद्धता
अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद स्पीकर ने सदस्यों को पर्याप्त अवसर देने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया

नई दिल्ली, 12 मार्च 2026 — लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद स्पीकर Om Birla ने गुरुवार को अपना आसन संभाला और सदन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि उनका हमेशा प्रयास रहा है कि सदन की गरिमा, मर्यादा और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती रहे। स्पीकर ने सदस्यों को पर्याप्त अवसर देने, नियमों और प्रक्रियाओं के तहत विचार व्यक्त करने और लोकतांत्रिक चर्चा को सशक्त बनाने पर जोर दिया।
ओम बिरला ने बताया कि उनका प्रयास सदन को समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज बनाने का रहा है। उन्होंने कहा कि सदस्यों को सक्रिय रूप से कार्यवाही में शामिल करने के लिए प्रेरित किया गया, विशेषकर उन लोगों को जो संकोच करते हैं या बोलते नहीं हैं। उनके अनुसार, सदन में बोलने से लोकतंत्र मजबूत होता है और सरकार की जवाबदेही तय होती है।
स्पीकर ने संसदीय लोकतंत्र की महान परंपरा, सहमति और असहमति की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने संविधान निर्माताओं के दृष्टिकोण को याद करते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत में संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं, बल्कि राष्ट्र की लोकतांत्रिक चेतना का केंद्र भी है।
उन्होंने संविधान के आर्टिकल 93 का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें दूसरी बार अध्यक्ष पद का अवसर मिला और उन्होंने सदन की कार्यवाही को निष्पक्ष, अनुशासित और संतुलित बनाए रखने का प्रयास किया। अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उन्होंने सदन की कार्यवाही से अपने आप को अलग रखा और सभी सदस्यों की बात को गंभीरता से सुना।
ओम बिरला ने कहा कि स्वतंत्र भारत के संसदीय इतिहास में यह तीसरी बार था जब उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर दो दिन तक चर्चा हुई। कुल 12 घंटे से अधिक समय तक सदन में विचार-विमर्श हुआ, जिसमें सभी सदस्यों ने अपनी दृष्टि और चिंताएं साझा कीं। स्पीकर ने सदन की कार्यकुशलता, निष्पक्षता और संसदीय लोकतंत्र की गरिमापूर्ण परंपराओं पर बल दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा भारत के 140 करोड़ नागरिकों की संप्रभु इच्छा का प्रतिनिधित्व करती है। सदन में उपस्थित हर सदस्य लाखों नागरिकों के जनादेश और उनके अपेक्षाओं, कठिनाइयों और समस्याओं को ध्यान में रखकर संसद में काम करता है।

