राहुल के आरोपों पर भाजपा का पलटवार, गिरिराज सिंह ने याद दिलाया नेहरू दौर का त्याग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपीलों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह को “विफलता का प्रमाण” बताए जाने पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 1962 के चीन युद्ध के दौरान जवाहरलाल नेहरू की अपील का उदाहरण देकर जवाब दिया।

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया अपीलों को सरकार की विफलता का संकेत बताया है। इसके बाद केंद्रीय मंत्री Giriraj Singh ने राहुल गांधी पर तीखा पलटवार करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru के दौर का उदाहरण सामने रखा।

प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में देशवासियों से वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया की परिस्थितियों को देखते हुए पेट्रोल की खपत कम करने, अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने, वर्क फ्रॉम होम अपनाने और कुछ समय तक सोने की खरीद टालने जैसी अपीलें की थीं। उन्होंने इसे राष्ट्रीय हित में जिम्मेदारी निभाने का समय बताया था।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह “सलाह नहीं, बल्कि विफलता का प्रमाण” है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों में देश की आर्थिक स्थिति ऐसी हो गई है कि अब जनता को यह बताया जा रहा है कि क्या खरीदना चाहिए और क्या नहीं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य नेताओं ने भी सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए।

राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय संकट के समय जनता से सहयोग मांगना कोई नई बात नहीं है। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी नागरिकों से सोना दान करने और त्याग करने की अपील की थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उस समय नेहरू को भी विफल कहा गया था।

गिरिराज सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री Lal Bahadur Shastri का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि खाद्यान्न संकट के दौरान शास्त्री ने लोगों से उपवास रखने की अपील की थी और देशवासियों ने उसका पालन भी किया था। उनके अनुसार राष्ट्रहित में जनता का सहयोग हमेशा महत्वपूर्ण रहा है।

इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। कांग्रेस जहां इसे केंद्र सरकार की आर्थिक और विदेश नीति की असफलता बता रही है, वहीं भाजपा इसे राष्ट्रीय जिम्मेदारी और जनभागीदारी का हिस्सा बता रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती महंगाई, ऊर्जा संकट और वैश्विक हालात के बीच यह बहस आने वाले दिनों में और अधिक तेज हो सकती है।

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