सेप्टिक टैंक हादसे ने उजाड़े तीन परिवार, सुरक्षा दावों पर सवाल
मुंडका में जहरीली गैस से तीन मजदूरों की मौत, मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया; फैक्टरी मालिक और ठेकेदार गिरफ्तार
मुंडका औद्योगिक क्षेत्र में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन मजदूरों की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर मैनुअल सीवर सफाई पर उठ रहे सवालों को सामने ला दिया है। हादसे में अरुण (38), संदीप (32) और चांद (42) की जान चली गई। दमकल कर्मियों ने तीनों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इस हादसे ने चांद के परिवार को गहरा सदमा दिया है। उनके पीछे ढाई साल की बेटी और आठ महीने का बेटा रह गया है, जिनके सिर से पिता का साया उठ गया। परिजनों ने बताया कि हादसे की खबर मिलते ही पूरा परिवार घटनास्थल पर पहुंचा, जहां अपनों को मृत देखकर मातम छा गया।
पुलिस ने मामले में फैक्टरी मालिक, एक कर्मचारी और ठेकेदार के खिलाफ लापरवाही सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के मजदूरों को टैंक में उतारने की बात सामने आई है।
यह हादसा ऐसे समय हुआ है, जब सरकारें सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई पूरी तरह मशीनों से कराने का दावा करती रही हैं। इसके बावजूद लगातार सामने आ रहे ऐसे हादसे इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन और आधुनिक मशीनों का अनिवार्य उपयोग ही ऐसे हादसों को रोक सकता है।




