खरगे के मनुस्मृति बयान पर संसद में हंगामा, रिकॉर्ड से हटाया गया विवादित हिस्सा
मानसून सत्र में पेपर लीक मुद्दे पर चर्चा के दौरान विपक्ष और सरकार आमने-सामने, सत्ता पक्ष ने मांगी माफी
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में गुरुवार को राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की एक टिप्पणी को लेकर जमकर हंगामा हुआ। पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा के दौरान खरगे ने सरकार पर कई आरोप लगाए, लेकिन मनुस्मृति को लेकर दिए गए उनके बयान पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया।
राज्यसभा में पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में कई परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों और बजट आवंटन को लेकर भी सरकार की आलोचना की।
इसी दौरान खरगे ने शैक्षणिक संस्थानों को लेकर टिप्पणी की और मनुस्मृति का जिक्र किया। उनके इस बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष के सदस्यों ने आपत्ति जताई और इसे विवादित बताते हुए विरोध शुरू कर दिया।
भाजपा नेताओं ने खरगे के बयान को तथ्यात्मक रूप से गलत और समाज में भ्रम पैदा करने वाला बताया। राज्यसभा में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्ष के नेता का बयान उचित नहीं है और उन्हें अपने शब्दों के लिए माफी मांगनी चाहिए।
सत्ता पक्ष का आरोप था कि खरगे की टिप्पणी से एक विशेष विचारधारा और समाज के प्रति गलत संदेश जा सकता है। वहीं विपक्ष ने कहा कि खरगे ने शिक्षा व्यवस्था और सरकारी नीतियों पर सवाल उठाए थे, जिन्हें राजनीतिक रूप से मुद्दा बनाया जा रहा है।
हंगामा बढ़ने के बाद राज्यसभा के सभापति ने मामले पर हस्तक्षेप किया। उन्होंने खरगे के बयान के एक हिस्से को सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्णय लिया। इसके बाद भी कुछ समय तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी रही।





