धराली आपदा का खतरा बरकरार

तेलगाड में बनी झील अब भी चिंता का कारण, मलबे से तबाह हुआ था सेना कैंप, नौ सैनिकों के लापता होने के बाद भी चुनौती कायम

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में पिछले वर्ष आई धराली आपदा का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। हर्षिल क्षेत्र के तेलगाड में बनी झील अब भी प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। भारी बारिश के दौरान इस झील का जलस्तर बढ़ने से दोबारा बड़ी तबाही की आशंका जताई जा रही है।

बीते वर्ष पांच अगस्त को खीर गंगा में आए मलबे के सैलाब ने धराली क्षेत्र में भारी नुकसान पहुंचाया था। इस आपदा में कई लोग प्रभावित हुए थे और करीब 70 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। इसी घटना के कुछ समय बाद हर्षिल की तेलगाड में भी भारी मात्रा में मलबा आया, जिसने सेना कैंप को अपनी चपेट में ले लिया था। इस हादसे में नौ सैनिकों के लापता होने की बात सामने आई थी।

तेलगाड से आए मलबे ने भागीरथी नदी के प्रवाह को भी प्रभावित किया था। नदी का रास्ता रुकने से वहां करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी झील बन गई थी। विशेषज्ञों और प्रशासन के लिए यह झील अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि अधिक बारिश होने पर जलस्तर बढ़ने से आसपास के क्षेत्रों में नुकसान का खतरा बढ़ सकता है।

पिछले महीने झील और तेलगाड का जलस्तर बढ़ने के बाद हर्षिल क्षेत्र में कटाव की स्थिति पैदा हो गई थी। इसके कारण आवासीय और सरकारी भवनों पर खतरा मंडराने लगा था। क्षेत्र में जीएमवीएन का एक टिनशेड भी बह गया था। वहीं, सेना कैंप की ओर से बड़े पेड़ों के टूटने के कारण नदी के बहाव में रुकावट का खतरा पैदा हो गया था।

स्थानीय लोगों की चिंता को देखते हुए प्रशासन ने नदी को चैनलाइज करने और अस्थायी सुरक्षा कार्य शुरू किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

हालांकि, स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अस्थायी उपाय पर्याप्त नहीं हैं। तेलगाड में बनी झील और आसपास के भू-भाग की लगातार निगरानी, वैज्ञानिक अध्ययन और स्थायी सुरक्षा उपायों की जरूरत है, ताकि भविष्य में किसी बड़ी आपदा से बचा जा सके।

धराली और हर्षिल क्षेत्र हिमालयी आपदा की संवेदनशीलता का उदाहरण बन चुके हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती है कि प्राकृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाएं और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

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