चार्जशीट से डॉक्टर का नाम हटाया, लोला मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल

विदेशी महिलाओं की बिना सूचना प्लास्टिक सर्जरी के आरोप में दर्ज एफआईआर से डॉक्टर को क्लीनचिट मिली, लोला की गिरफ्तारी के बाद फिर हिरासत में लेकर पूछताछ

लोला की प्लास्टिक सर्जरी से जुड़े मामले में आरोपी डॉक्टर विवेक गुप्ता को लेकर पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि डॉक्टर ने स्थानीय पुलिस, प्रशासन और विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय को सूचना दिए बिना विदेशी महिलाओं की प्लास्टिक सर्जरी की थी। इस मामले में जून 2025 में दर्ज प्राथमिकी में डॉक्टर का नाम भी शामिल था।

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने विवेक गुप्ता का नाम आरोपपत्र से हटा दिया और उन्हें क्लीनचिट दे दी। इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि जब प्राथमिकी में डॉक्टर आरोपी थे तो विवेचना के दौरान उनका नाम किस आधार पर हटाया गया। अब लोला के पकड़े जाने के बाद पुलिस ने डॉक्टर को दोबारा हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।

पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की विवेचना और कार्रवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि डॉक्टर के खिलाफ पर्याप्त आधार नहीं था तो अब उन्हें दोबारा पूछताछ के लिए क्यों बुलाया गया? वहीं, यदि पुलिस को डॉक्टर की भूमिका संदिग्ध लग रही है तो पहले की जांच में उन्हें क्लीनचिट दिए जाने की वजह क्या थी?

फिलहाल पुलिस डॉक्टर से पूछताछ कर मामले से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि डॉक्टर की भूमिका क्या थी और पहले उनका नाम आरोपपत्र से हटाने का फैसला किन परिस्थितियों में लिया गया था।

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