मिडिल ईस्ट तनाव से महंगा हुआ कुकिंग ऑयल, बिगड़ा रसोई बजट
ईरान-इजरायल तनाव के असर से खाने के तेल की कीमतों में उछाल, आयात पर निर्भरता बनी बड़ी वजह

नई दिल्ली, 26 मार्च। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम आदमी की रसोई तक पहुंच गया है। Middle East में जारी संघर्ष के कारण कुकिंग ऑयल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जिससे घर का बजट बिगड़ने लगा है।
पिछले एक महीने में खाने के तेल के दामों में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है। बाजार आंकड़ों के अनुसार, सूरजमुखी तेल 175 रुपये से बढ़कर 181 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं पाम ऑयल 5 रुपये महंगा होकर 141 रुपये प्रति किलो पर आ गया है। सोयाबीन तेल में 4 रुपये और सरसों, मूंगफली व वनस्पति तेल में करीब 3 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
भारत में कुकिंग ऑयल की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन घरेलू उत्पादन उस गति से नहीं बढ़ पा रहा। यही कारण है कि देश को अपनी जरूरत का लगभग 56 फीसदी तेल आयात करना पड़ता है। शहरी क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति सालाना औसतन 12 किलो और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 11 किलो तेल की खपत होती है, जो इस बढ़ती मांग को दर्शाता है।
आयात के आंकड़े भी इस निर्भरता को स्पष्ट करते हैं। 2017 में जहां भारत ने 11.8 अरब डॉलर का तेल आयात किया था, वहीं 2022 में यह बढ़कर 21.1 अरब डॉलर हो गया। हालांकि 2025 में इसमें थोड़ी गिरावट आई और यह 18.6 अरब डॉलर रहा। आयातित तेल में सबसे बड़ी हिस्सेदारी पाम ऑयल (41%) की है, जबकि सोयाबीन तेल (35%) और सूरजमुखी तेल (18%) इसके बाद आते हैं।
इस बीच सरकार ने आश्वासन दिया है कि India में तेल की सप्लाई पर कोई बड़ा संकट नहीं है। देश मलेशिया, इंडोनेशिया और अमेरिका जैसे कई देशों से आयात करता है, जिससे आपूर्ति बनी रहती है। साथ ही, आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए ‘नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स-ऑयलसीड्स’ योजना भी शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन को बढ़ाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो आने वाले समय में कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे आम लोगों पर महंगाई का दबाव और बढ़ेगा।




