यमुना स्वच्छता के लिए दिल्ली सरकार का बड़ा संकल्प, ग्रीन बजट का बड़ा हिस्सा आवंटित
एलजी और मुख्यमंत्री के संयुक्त निरीक्षण में रिवरफ्रंट विकास, फ्लडप्लेन पुनर्जीवन और प्रदूषण नियंत्रण को मिशन मोड में आगे बढ़ाने के निर्देश

नई दिल्ली में यमुना नदी के पुनर्जीवन और स्वच्छता को लेकर दिल्ली सरकार ने बड़ा संकल्प लिया है। उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कश्मीरी गेट स्थित वासुदेव घाट और यमुना बाजार घाट का निरीक्षण कर स्वच्छता, आधारभूत ढांचे और रिवरफ्रंट विकास कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि यमुना को एक स्वच्छ, हरित और सतत नदी तंत्र के रूप में विकसित करने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएं।
निरीक्षण में वासुदेव घाट जैसे विकसित स्थलों और अन्य घाटों के बीच अंतर को रेखांकित करते हुए, सभी घाटों को पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक स्थलों के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने वजीराबाद से ओखला तक फ्लडप्लेन पुनर्स्थापन, जैव-विविधता संरक्षण, वेटलैंड्स विकास और ग्रीनवे परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी भी प्रस्तुत की।
उपराज्यपाल ने बताया कि यह पहल नागरिकों से मिले फीडबैक पर आधारित है, जिसमें यमुना प्रदूषण, जल संकट और बाढ़ जैसी समस्याएं प्रमुख रूप से सामने आई थीं। उन्होंने यमुना और वायु प्रदूषण को “समझौता न करने वाली प्राथमिकता” बताते हुए इसे मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2026-27 के बजट में 22,236 करोड़ रुपये का ग्रीन बजट रखा गया है, जो कुल बजट का लगभग 21.44 प्रतिशत है। इसका बड़ा हिस्सा यमुना सफाई, सीवेज ट्रीटमेंट और डी-सिल्टिंग कार्यों के लिए आवंटित किया गया है। उन्होंने कहा कि यमुना का पुनर्जीवन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसे दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाएगा।
सरकार ने अतिक्रमण हटाने, जल प्रवाह को सुचारु बनाने और जलभराव वाले क्षेत्रों का स्थायी समाधान करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही घाटों को स्थायी सार्वजनिक परिसंपत्तियों के रूप में विकसित करने और उन्हें एक निरंतर श्रृंखला के रूप में जोड़ने पर भी बल दिया गया।
अंत में अधिकारियों को सख्त मॉनिटरिंग, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सीवेज नियंत्रण पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने के निर्देश दिए गए, ताकि यमुना तट को स्वच्छ, सुंदर और टिकाऊ बनाया जा सके।



