नंदीग्राम उपचुनाव TMC के लिए बन रहा अगला ‘फलता’, ममता के गढ़ में बढ़ी बेचैनी
फलता में करारी हार के बाद अब नंदीग्राम पर टिकी बंगाल की राजनीति, शुभेंदु अधिकारी ने सेट किया ‘लैंडस्लाइड जीत’ का टारगेट।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में अब नंदीग्राम उपचुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है। फलता उपचुनाव में मिली बड़ी हार के बाद TMC के भीतर जिस तरह की बेचैनी दिख रही है, उसका असर अब नंदीग्राम में भी दिखाई देने लगा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर नंदीग्राम में भी TMC कमजोर पड़ती है, तो यह पार्टी के लिए बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका साबित हो सकता है।
फलता में BJP ने रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, BJP उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने एक लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की, जबकि TMC चौथे स्थान तक पहुंच गई। इस नतीजे ने बंगाल की राजनीति में बड़ा संदेश दिया है कि सत्ता बदलने के बाद राज्य का राजनीतिक मूड तेजी से बदल रहा है।
अब यही ‘फलता इफेक्ट’ नंदीग्राम में महसूस किया जा रहा है। मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने खुद नंदीग्राम उपचुनाव के लिए भारी जीत का लक्ष्य तय किया है। Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कार्यकर्ताओं से फलता जैसी बड़ी जीत दोहराने की अपील की है।
नंदीग्राम का राजनीतिक महत्व पहले से बेहद बड़ा रहा है। 2007 के भूमि आंदोलन ने ही Mamata Banerjee को बंगाल की राजनीति के केंद्र में पहुंचाया था और इसी आंदोलन से शुभेंदु अधिकारी का कद भी बढ़ा।
2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी पहले ही बंगाल की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में उभर चुके हैं। BJP की सरकार बनने और शुभेंदु के मुख्यमंत्री बनने के बाद नंदीग्राम अब राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर TMC नंदीग्राम में मजबूत प्रदर्शन नहीं कर पाती, तो यह सिर्फ एक सीट की हार नहीं होगी, बल्कि बंगाल में पार्टी के संगठनात्मक मनोबल पर भी असर डाल सकती है। दूसरी ओर BJP इसे बंगाल में अपनी पकड़ और मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है।



