यूक्रेन युद्ध के साये में फीकी पड़ी रूस की विजय दिवस परेड, पुतिन ने फिर दोहराया जीत का दावा

रेड स्क्वायर पर इस बार कम दिखी सैन्य ताकत, टैंकों की कमी और सुरक्षा चिंताओं के बीच बदला माहौल

रूस में हर साल धूमधाम से मनाया जाने वाला विजय दिवस इस बार काफी बदले हुए माहौल में नजर आया। व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी में रेड स्क्वायर पर आयोजित सैन्य परेड यूक्रेन युद्ध की वजह से अपेक्षाकृत फीकी दिखाई दी।

इस बार परेड में भारी सैन्य उपकरणों और आधुनिक टैंकों की संख्या बेहद कम रही। कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यूक्रेन युद्ध में लगातार इस्तेमाल और नुकसान की वजह से रूस अपनी सैन्य ताकत का खुला प्रदर्शन पहले जैसा नहीं कर पाया। यही वजह रही कि रेड स्क्वायर पर इस बार परेड का स्वरूप सीमित नजर आया।

अपने संबोधन में पुतिन ने एक बार फिर यूक्रेन युद्ध को रूस की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से जुड़ा बताते हुए जीत का दावा दोहराया। उन्होंने कहा कि रूस अपने लक्ष्यों को हासिल करके रहेगा और देश की सेना “ऐतिहासिक जिम्मेदारी” निभा रही है।

हालांकि इस बार विजय दिवस समारोह पर सुरक्षा चिंताओं का असर भी साफ दिखाई दिया। मॉस्को समेत कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रखी गई थी। ड्रोन हमलों और संभावित खतरों को देखते हुए कई सार्वजनिक गतिविधियों पर भी निगरानी बढ़ाई गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि रूस के लिए विजय दिवस सिर्फ ऐतिहासिक आयोजन नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन और राष्ट्रीय एकजुटता का प्रतीक भी होता है। लेकिन यूक्रेन युद्ध लंबा खिंचने और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण इस बार समारोह का राजनीतिक संदेश ज्यादा मजबूत दिखाई दिया।

पश्चिमी देशों की ओर से रूस पर लगातार प्रतिबंध लगाए जाने और युद्ध को लेकर बढ़ती आलोचना के बीच पुतिन ने अपने भाषण में पश्चिमी शक्तियों पर भी अप्रत्यक्ष निशाना साधा। उन्होंने रूस की सेना और नागरिकों की “एकजुटता” की तारीफ करते हुए संघर्ष जारी रखने की बात कही।

इस बार की परेड ने यह साफ संकेत दिया कि यूक्रेन युद्ध अब सिर्फ युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि रूस की आंतरिक राजनीति, अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों पर भी उसका असर दिखाई देने लगा है।

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